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फुटबॉल प्रतिभाओं की पौध तैयार करती है गांव की नर्सरी, खिलाड़ी राष्टीय स्तर पर भी ले चुके हैं हिस्सा

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फोटो नंबर 72: सुमित, नेशनल फुटबॉल खिलाड़ी।
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मनोज कौशिक
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बादली। फुटबॉल की बात जब भी हरियाणा में होती है, तो बादली गांव का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। यह गांव वर्षों से फुटबॉल प्रतिभाओं की नर्सरी के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। यहां की गलियों और मैदानों से निकलकर कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

बादली का फुटबॉल इतिहास कई दशकों पुराना है। गांव में हर वर्ष बड़े स्तर पर फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जिसमें हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की टीमें हिस्सा लेती हैं। लाखों रुपये की इनामी राशि वाली यह प्रतियोगिता क्षेत्र में खेलों के प्रति युवाओं का उत्साह बढ़ाने के साथ-साथ नई प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान करती है।
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गांव के कई खिलाड़ी संतोष ट्रॉफी, राष्ट्रीय चैंपियनशिप तथा विभिन्न पुलिस और सर्विसेज टीमों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वहीं सुमित, नवनीत, जसबीर, अमित, रोहित, पवन, संजय, बलकेश, विकास, संदीप, प्रदीप, टिल्लू, नंदा और दयानंद सहित गांव के अनेक खिलाड़ी वर्तमान में हरियाणा पुलिस, दिल्ली पुलिस, उत्तर प्रदेश पुलिस तथा भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।




लड़कियां भी अब फुटबॉल में अपनी अलग पहचान बना रही हैं और कई खिलाड़ी विश्वविद्यालय स्तर तक पहुंच चुकी हैं। गांव में खेल नर्सरी के स्थापित होने से खिलाड़ियों को फायदा मिला है
नवनीत, हेड कोच दिल्ली विश्वविद्यालय।

सोसाइटी दे रही बढ़ावा
गांव में खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए स्पोर्ट्स सोसाइटी का गठन किया गया है जो विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराती है। गांव के युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने में वरिष्ठ खिलाड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
हितेश, संतोष ट्राफी खिलाड़ी।

कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में रेफरी की भूमिका निभा रहे हैं। इससे गांव के युवाओं में खेलों के प्रति नई सोच विकसित हुई है और वे खेल को कॅरिअर के रूप में भी अपनाने लगे हैं।
सुमित, नेशनल फुटबॉल खिलाड़ी।

नेशनल टूर्नामेंट में लिया हिस्सा
गांव के अनेक खिलाड़ी संतोष ट्रॉफी, ऑल इंडिया पुलिस चैंपियनशिप, फेडरेशन कप और विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन कर चुके हैं।
अशोक, फुटबॉल खिलाड़ी।

बादली में अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान भी फुटबॉल खेला जाता था। खेल आज भी परंपरा के रूप में जीवित है और नई पीढ़ी इसे आगे बढ़ा रही है। इससे खिलाड़ियों में अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता का विकास होता है।
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रामभगत, स्पोर्ट्स सोसाइटी।


फोटो नंबर 72: सुमित, नेशनल फुटबॉल खिलाड़ी।
फोटो नंबर 73: हितेश, संतोष ट्राफी खिलाड़ी।
फोटो नंबर 74: रामभगत, स्पोर्ट्स सोसाइटी।
फोटो नंबर 75: नवनीत, हेड कोच दिल्ली विश्वविद्यालय।
फोटो नंबर 77: संदीप, संतोष ट्रॉफी खिलाड़ी।
फोटो कैप्शन 76: वीडियो न्यूज़ का क्यूआर

फोटो नंबर 72: सुमित, नेशनल फुटबॉल खिलाड़ी।

फोटो नंबर 72: सुमित, नेशनल फुटबॉल खिलाड़ी।

फोटो नंबर 72: सुमित, नेशनल फुटबॉल खिलाड़ी।

फोटो नंबर 72: सुमित, नेशनल फुटबॉल खिलाड़ी।

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