चंडीगढ़। नगर निगम सदन की बैठक में वीरवार को मेयर सुभाष चावला को भ्रष्ट बताने वाली एक बेनामी चिट्ठी ने हंगामा करवा दिया। चिट्ठी में अधिकारियों से वसूली की बात लिखी गई है। इसके बाद मामला इतना बढ़ गया कि मेयर बैठक में से दो बार उठकर तो गए ही, साथ ही इस्तीफा देने तक की बात कह दी।
सदन की बैठक के दौरान भाजपा पार्षद अरुण सूद ने मेयर को एक चिट्ठी दी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उन्हें यह चिट्ठी डाक से मिली है। वे इस चिट्ठी को सदन में पढ़ नहीं सकते, इसलिए स्वयं पढ़कर इसकी जांच कराएं। इस पर मेयर ने कहा कि चिट्ठियां लिखने का चलन सा हो गया है। इस चिट्ठी का कोई महत्व नहीं है। इसमें किसी के हस्ताक्षर नहीं है। इसी प्रकार की चिट्ठी प्रशासक शिवराज पाटिल के अलावा शहर के सांसद पवन कुमार बंसल, प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा, नगर निगम कमिश्नर विवेक प्रताप सिंह और सभी पार्षदों को भेजी गई है। इसमें भेजने वाले ने अपना नाम नहीं लिखा है। मेयर का कहना है कि उन पर निराधार आरोप लगाया जा रहा है। चिट्ठी मिलने के बाद मेयर बेहद गुस्से में आ गए और उन्होंने तेज आवाज में कहा कि 35 पार्षदों में से यदि कोई भी उनके भ्रष्ट होने के संबंध में शपथ दे तो वह जांच होने तक मेयर की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। हालांकि अरुण सूद ने सफाई दी कि वह मेयर पर आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि उनके पास आई चिट्ठी को उन्हें देने के साथ ही मामले की जांच कराने की बात कह रहे हैं। बाद में मनोनीत और कांग्रेसी पार्षदों के बुलाने पर ही मेयर बैठक में वापस आए। हंगामे के बाद भाजपा पार्षदों ने कहा कि मेयर को बैठक छोड़कर नहीं जाना चाहिए था।
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अधिकारियों से वसूली का है आरोप
चिट्ठी में सिर्फ ‘प्रेसिडेंट, इंजीनियरिंग स्टाफ ऑफ एमसी, सीएचडी’ टाइप किया हुआ है। इसमें भेजने वाले का नाम नहीं लिखा गया है। इस बेनामी चिट्ठी में कहा गया है कि भ्रष्ट मेयर सुभाष चावला को हटाया जाए क्योंकि उन्होंने सभी सीमाएं लांघ दी हैं। वह एसई, एसडीओ, जेई को सस्पेंड कराने, टर्मिनेट कराने और ट्रांसफर कराने की धमकी देकर वसूली कर रहे हैं। पिछले समय में उन्हें 15 लाख रुपये दिए गए हैं और वह फिर से पैसे की मांग कर रहे हैं। चिट्ठी में लिखने वाले ने स्पष्ट किया है कि उसने मेयर के भ्रष्ट कामों के बारे में कई पार्षदों को भी बताया है। सभी पार्षद मेयर की दादागिरी से परेशान हैं। यहां तक कि कांग्रेस के पार्षद भी मेयर के इस रवैये दुखी हैं।