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पुलिस को चकमा दे प्लाजा में प्रदर्शन

Fri, 09 Aug 2013 05:35 AM IST
Chandigarh
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चंडीगढ़। प्रशासन की मनमानी के खिलाफ व्यापारियों ने वीरवार को संघर्ष शुरू कर दिया। धारा-144 की धज्जियां उड़ाते हुए व्यापारी सेक्टर-17 स्थित प्लाजा में तय समय पर बड़ी संख्या में जुटे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इससे पहले विरोध के लिए गठित 12 संगठनों की संयुक्त संघर्ष समिति (जेएसी) ने कार रैली निकाली। इस रैली के दौरान पुलिस ने इन सभी को काफी तंग किया और रैली को तितिर-बितर करने के लिए उन्हें टुकड़ों में अलग-अलग रास्तों से जाने को विवश किया। बिल्डिंग वायलेशन पर मनमानी पेनल्टी और कलेक्टर रेट बढ़ाने से व्यापारी समुदाय और रेजिडेंट्स गुस्से में हैं।
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पहले की मनाने की कोशिश
व्यापारियों, उद्यमियों और रेजिडेंट्स के 12 संगठनों के सदस्य वीरवार सुबह दस बजे ट्रिब्यून चौक के पास जमा होने लगे। कारों का हुजूम लगने लगा। हालात काबू में रखने के लिए वहां पहले से ही बड़ी संख्या में पुलिस मौजूद थी। पुलिस अधिकारियों ने अलग-अलग संगठनों के अध्यक्षों से बात कर उन्हें रैली न करने के लिए मनाने की कोशिश की। मगर कोई भी फैसला बदलने को तैयार नहीं हुआ। इस पर पुलिस की गाड़ियां भी रैली के साथ चलने लगीं। रास्ते में चौराहों पर आंदोलनकारियों की कुछ कारों को निकलने दिया जाता और कुछ को दूसरे रास्ते पर मुड़ने के लिए मजबूर कर दिया। ये संगठन सेक्टर-17 में पहुंच कर विरोध प्रदर्शन करना चाह रहे थे, जबकि पुलिस चाहती थी कि वे इसके लिए सेक्टर-25 के रैली ग्राउंड में जाएं। पुलिस ने व्यापारियों की कारों को शहर में घुमाते हुए सेक्टर-38 पहुंचने को मजबूर कर दिया।

ऐसे दी पुलिस को मात
जब व्यापारियों ने देखा कि पुलिस और प्रशासन उनकी रैली को फ्लाप करने में जुटा है तो उन्होंने भी सेक्टर-38 पहुंच कर आश्वासन दिया कि अब कार रैली नहीं निकलेगी। पुलिस इस पर संतुष्ट हो गई और इसके बाद सैंकड़ों व्यापारी कारें लेकर सेक्टर-17 में पहुंच गए। प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए डीसी मोहम्मद शाईन ने वीरवार को सेक्टर-17 प्लाजा के एक हजार मीटर के रेडियस में धारा 144 लगाने के निर्देश जारी किए थे जो कि सुबह 10 से रात 12 बजे तक प्रभावी थे। धारा 144 की परवाह न करते हुए व्यापारी बड़ी संख्या में प्लाजा के आसपास एकत्र हुए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान वहां पुलिस बल तैनात था। लेकिन, उनके पास व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश नहीं थे। हालाकि सेक्टर-17 में व्यापारियों के साथ उनकी दुकानों में काम करने वाले कर्मचारी मौजूद थे।
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मार्केट रहा बंद
व्यापारियों ने दो घंटे तक सेक्टर-17 की मार्केट को भी बंद रखा। दोपहर 12 से 2 बजे तक सेक्टर-17 में अधिकतर दुकानें बंद रहीं जिससे लोगों को बिना शॉपिंग किए ही लौटना पड़ा।

वित्त सचिव ने दिया आश्वासन
जेएसी के सदस्यों ने चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष चिरंजीव सिंह के नेतृत्व में वित्त सचिव से मिलकर उन्हें ज्ञापन भी दिया। वित्त सचिव ने उन्हें आश्वासन दिया कि 500 रुपये प्रति वर्ग फुट पेनेल्टी लगाने के मामले में जल्द फैसला होगा। जेएसी अब प्रशासक के सलाहकार के साथ बैठक करने के बाद ही आगे की रणनीति बनाएगी।



व्यापारियों की बात
कोट
प्रशासन व्यापारियों को बिना वजह परेशान कर रहा है। जिस तरह से व्यापारियों पर मिसयूज चार्जेस लगाए जा रहे हैं उससे उन्हें अपना कारोबार बंद करना पड़ेगा।
-संजीव चड्ढा, अध्यक्ष, सेक्टर-17 सी और डी मार्केट
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हमने वित्त सचिव से मिलकर उनके सामने अपनी मांगें रखी हैं। उनका रवैया सकारात्मक रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि प्रशासन इन पर जल्द ध्यान देगा
-विनोद जोशी, सीनियर मेंबर, चंडीगढ़ व्यापार मंडल
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अगले सप्ताह प्रशासक के सलाहकार से मिलेंगे और उनके सामने अपनी मांगे रखेंगे। अगर मांगें नहीं मानी जातीं तो हम आंदोलन की अगली रणनीति बनाएंगे।
चिरंजीव सिंह, अध्यक्ष, चंडीगढ़ व्यापार मंडल
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प्रशासन जिस तरह से व्यापारियों के साथ अन्याय कर रहा है। उससे आने वाले समय में में कोई भी उद्यमी शहर में नहीं आएगा। प्रशासन की गलत नीतियों के कारण उद्यमियों को नुकसान हो रहा है।
-चंद्र वर्मा, चेयरमैन, चंडीगढ़ कनवर्टेट प्लाट ओनर्स एसोसिएशन
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प्रशासन पहले तो व्यापारियों पर मनमानी पेनल्टी लगाता है और हमें अपनी आवाज भी उठाने नहीं देता। प्रशासन ने व्यापारियों को रोकने के लिए कई उपाय किए। हम चाहते हैं कि हमारी मांगों पर जल्द सुनवाई हो।
-एमपीएस चावला, अध्यक्ष, चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
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प्रशासन ने जिस तरह से 500 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से पेनल्टी लगाई है, उससे व्यापारियों के लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा। व्यापारी अगर करोड़ों रुपये का जुर्माना दे देंगे तो बच्चे कैसे पालेंगे?
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- जेपीएस कालरा, महा सचिव, चंडीगढ़ बिजनेस कौंसिल और सेक्टर-17 मार्केट एसोसिएशन

यह है जेएसी की मांगे
-कलेक्टर रेट में की गई 50 फीसदी बढ़ोतरी को वापस लिया जाए।
-लीजहोल्ड प्रापर्टी को फ्रीहोल्ड में ट्रांसफर करने की अनुमति
-बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन हो
-500 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से लगाई गई पेनल्टी को वापस ली जाए
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