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झटका: छत्तीसगढ़ के 11 कांग्रेस नेताओं ने भाजपा का थामा दामन, पार्टी से चल रहे थे नाराज

Sat, 11 Sep 2021 02:52 PM IST
प्रशांत कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर

सार

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट के बीच भाजपा ने पार्टी की जमीन हिलाकर रख दी है। भाजपा ने ऐसी स्क्रिप्ट तैयार की एक दो नहीं बल्कि 11 कांग्रेस नेता भगवा पार्टी में शामिल हो गए हैं। भाजपा के इस फैसले से कांग्रेस आलाकमान भी हैरान है। 
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भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस नेता - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के लिए जहां सियासी घमासान मचा हुआ है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव आमने-सामने हैं। वहीं, भाजपा ने चुपके-चुपके पार्टी में सेंधमारी कर दी है। कांग्रेस नेता वेदराम मनहरे सहित 10 कांग्रेसी नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी ने शुक्रवार को उन्हें दिल्ली में पार्टी की सदस्यता दिलाई है। इसके बाद पार्टी ने उन्हें छत्तीसगढ़ में नशामुक्त समाज आंदोलन का प्रभारी बना दिया।

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मनहरे तिल्दा जनपद पंचायत के 2 बार अध्यक्ष और उपाध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वो सतनामी समाज के संरक्षक भी हैं।  2018 के विधानसभा चुनाव में मनहरे रायपुर जिले की आरंग सीट से प्रबल दावेदार थे। हालांकि, कांग्रेस ने उन्हें टिकट ना देकर शिव डहरिया को चुनावी मैदान में उतार दिया। 

भाजपा में शामिल होने वाले कांग्रेस नेता पसदा के सरपंच मिथलेश साहू, पचरी सरपंच अभिषेक वर्मा, कांग्रेस के संयुक्त महामंत्री रहे पुरनेंद्र नायक, तिल्दा जनपद पंचायत सदस्य अरूण भारद्वाज, रायपुर जिला पंचायत के पूर्व सदस्य राजू ओगरे, अनिल सोनवानी, दीपेंद्र वर्मा, गोविंद साहू, टीका पटेल हैं। ये सभी नेता गुरुवार की रात ही रायपुर से दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे। 
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मनहरे के जाने से कांग्रेस को होगा नुकसान  
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वेदराम मनहरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर प्रदेश की सियासी हलचलों की जानकारी देने वाले थे।  मनहरे के इस तरह से भाजपा में शामिल होने को कांग्रेस को बड़ा झटका लगने के तौर पर देखा जा रहा । मनहरे कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता रहे हैं। सतनामी समाज में उनकी अच्छी पकड़ है। जानकारों के मुताबिक, भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने 2023 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के मद्देनजर अभी से कमर कस ली है। बस्तर चिंतन बैठक भी इसी कड़ी से जुड़ी है।
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