रीपा तहत मां चन्द्रहसिनी महिला समूह गणेश की प्रतिमा बना रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ की महिलाएं रीपा योजना से पहले खेत खलिहान और मिट्टी से जुड़े कामकाज करती थी। माटी कला को निखारे के लिए पर्याप्त संसाधन और आय का जरिया नहीं था, लेकिन अब रीपा योजना आने के बाद महिलाएं सशक्त हो गई हैं। इस योजना के तहत महिला स्व सहायता समूहों ने अपने हुनर और मेहनत से एक नई पहचान बनाई है। कई प्रकार के निर्माण कार्य कर रहे हैं। इसी क्रम में महासमुंद जिले के मां चन्द्रहसिनी महिला समूह गणेश चतुर्थी का त्यौहार के अवसर पर गणेश की प्रतिमा बना रहे हैं।
महिला स्व सहायता समूहों ने एलईडी बल्ब का निर्माण, फेंसिंग तार जाली का निर्माण, फ्लाई ऐस ईंट या गोबर पेंट का निर्माण या खाद्य सामग्री का निर्माण का काम कर रही हैं। इसी प्रकार कई कामों को कर रही है, इससे उनका आर्थिक स्थिति भी बदल रहा है। हाल ही में रक्षाबंधन के अवसर पर महिला समूह ने कम कीमत पर आकर्षक राखियां बनाकर अपने हुनर से सबको परिचित कराया था। इस बार गणेश चतुर्थी के अवसर पर महासमुंद जिले में समूह की महिलाओं ने गणेश प्रतिमा का निर्माण किया है।
महिलाओं के हाथों से बनी मूर्ति पंडालों में विराजेंगे
महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क गोड़बहाल से जुड़कर मां चन्द्रहसिनी महिला समूह की दीदियां कई आकार और रंगो की आकर्षक गणेश प्रतिमा का निर्माण कर रही हैं। ये महिला समूह पहले माटी कला कार्य से जुड़कर कार्य कर रही थीं। अब रीपा योजना आने पर इन्हें ज्यादा संसाधन और अवसर मिला। महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड के ग्राम पंचायत गोडबहाल गौठान से जुड़ी रीपा योजनांतर्गत चंद्रहासिनी स्व सहायता समूह की महिलाएं गणेश प्रतिमा का निर्माण कर रही हैं। इस बार महिला समूह की ओर से बने गए गणपति घरों और जगह-जगह पंडालों में विराजेंगे।
महिला समूह बना रही हैं गणेश प्रतिमा
चंद्रहासिनी स्व सहायता समूह की अध्यक्ष नीरा निषाद ने बताया कि वे लगभग 500 गणेश प्रतिमा का निर्माण कर रही हैं। अभी पहली खेप बाजार में उतर गई है। इससे अच्छा प्रतिसाद मिला है। उनोंहे बताया कि इस बार गणेश प्रतिमा के बिकने से ही लगभग 1 लाख रुपए आय होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि उनके पास कई आकार में 200 से लेकर 4 हजार रुपए तक की प्रतिमा हैं, जी कि कई रंगों और आकर्षक तरीके से बनाए गए हैं ।
माटी कला से 3 लाख की आमदनी
चंद्रहासिनी स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि रीपा के तहत काम करके आत्मनिर्भरता का अनुभव हो रहा है। उन्होंने बताया कि चंद्रहासिनी स्व सहायता समूह में 10 महिलाएं हैं, जो माटी कला का काम करते हैं। इससे प्रतिमाह लगभग 8 हजार रुपए की आमदनी हो जाती है। अब तक माटी कला काम से समूह को खर्च काटकर लगभग 3 लाख रुपए की आमदनी हो चुकी है।