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GPM: धान पासिंग के नाम पर किसानों से हो रही अवैध वसूली, ग्रेडर एक से लेकर छह हजार तक कर रहा उगाही

Fri, 01 Dec 2023 02:34 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेण्ड्रा मरवाही

सार

पैसा नहीं देने के कारण कहीं ग्रेडर नाराज ना हो जाए और उनका धान खरीदी के लिए निरस्त न कर दे इस डर से किसान भी दुखी मन से ही शोषण का शिकार हो रहे हैं। 
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शेख इरफान कृषि विस्तार अधिकारी ग्रेडर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के धान खरीदी केंद्र निमधा में ग्रेडर द्वारा धान पासिंग के लिए किसानों से अवैध वसूली का मामला प्रकाश में आया है। शिकायत है कि कृषि विभाग का कर्मचारी शेख इरफान द्वारा धान खरीदी केंद्र में किसानों से धान पासिंग करने के लिए हजारों रुपए वसूल लिए गए हैं। किसानों का आरोप है कि उक्त ग्रेडर अवैध वसूली करते हुए कहता है कि कलेक्टर और एसडीएम व उच्च अधिकारियों को भी पैसा देना है।

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दूबर पर दो आषाढ़ की कहावत गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के किसानों पर बिल्कुल ठीक बैठती है। हाड़-तोड़ परिश्रम एवं पूंजी लगाने के बाद हुई धान की फसल को बेचने में किसानों को अपना आर्थिक शोषण करना पड़ रहा है, यह कारनामा जिले के धान खरीदी केंद्रों में खुलेआम चल रहा है। कठिन परिश्रम के बाद जब अपने खून पसीने की कमाई बेचने किसान धान खरीदी केंद्रों में पहुंच रहा है, तो वहां धान पासिंग करने वाले कृषि अधिकारी जिन्हें ग्रेडर कहा जाता है, वह किसानों से धान पासिंग करने के एवज में अवैध वसूली कर रहे हैं। 


पैसा नहीं देने के कारण कहीं ग्रेडर नाराज ना हो जाए और उनका धान खरीदी के लिए निरस्त न कर दे इस डर से किसान भी दुखी मन से ही शोषण का शिकार हो रहे हैं, ऐसे में गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में किसानों की ऐसी स्थिति हो गई है कि आखिर यह किसान जाए तो जाए कहां। ग्रेडर द्वारा अवैध वसूली किए जाने का ऐसा ही एक मामला जिले के निमधा स्थित धान खरीदी केंद्र में प्रकाश में आया है जहां धान खरीदी केंद्र में नियुक्त कृषि कर्मचारी जो ग्रेडर है के द्वारा किसानों से हजारों रुपए की वसूली की जा रही है। शोषित किसानों ने मीडिया के सामने स्वीकार किया कि ग्रेडर शेख इरफान द्वारा उनसे धान पासिंग करने के लिए पैसे की वसूली की गई है किसी किसान से 6000 किसी किसान से 1500 रुपये की वसूली सिर्फ इसलिए की गई कि यदि वह पैसा नहीं देंगे तो उनका धान खरीदी के लिए पास नहीं किया जाएगा। किसानों ने बताया कि उक्त ग्रेडर शेख इरफान द्वारा किसानों से यह भी कहा जा रहा है की जिले की कलेक्टर और एसडीएम व उच्च अधिकारियों को भी इस पैसे को देना पड़ता है। 

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बता दें कि जब से छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धान खरीदी की कीमत बढ़ाई गई है तब से सरकारी तंत्र से जुड़े अधिकारी कर्मचारियों की टेढ़ी निगाह किसानों की गाढ़ी कमाई पर है। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के परिणाम तीन दिसंबर  को आने हैं तथा चुनाव परिणाम के बाद किसानों के धान खरीदी का क्रय मूल्य और अधिक होने की संभावना है। ऐसे में धान खरीदी से जुड़े अधिकारी कर्मचारी धान बेचने आए किसानों को मोटा मुर्गा की निगाह से देख रहे हैं।  तथा उनकी नजर किसान को होने वाली संभावित कमाई पर है। ऐसे में अब जरूरी है कि धान खरीदी चलने तक जिला प्रशासन ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति करें जो धान खरीदी में किसानों को शोषण से बचा सके। 

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