सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ कैडर के निलंबित आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह को बड़ा झटका दिया है। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण की अध्यक्षता वाली बेंच ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। गौरतलब है कि जीपी सिंह ने हाईकोर्ट की तरफ से गिरफ्तारी और अपने खिलाफ जारी जांच पर स्टे न मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
गौरतलब है कि जीपी सिंह के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार ने राजद्रोह और आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आपराधिक मामले दर्ज कराए हैं। इससे पहले उनके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच बिठाई थी। जांच के तहत ही जीपी सिंह के अलावा उनके करीबियों के घर पर भी छापेमारी हुई, जिसमें 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त होने का मामला सामने आया था। इन्हीं मामलों के खुलासे के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाया और उन्हें निलंबित कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले गिरफ्तारी से बचाया था
इससे पहले अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने जीपी सिंह को गिरफ्तारी से संरक्षण दिया था। तब अदालत ने छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार पर तंज कसा था और कहा था कि सरकार बदलने पर राजद्रोह के मामले दायर करना एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति है। तब सीजेआई एनवी रमण और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने राज्य पुलिस को इन मामलों में अपने निलंबित वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी गुरजिंदर पाल को गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश दिया है। पीठ ने सिंह को जांच में एजेंसियों के साथ सहयोग करने के भी निर्देश दिए।
जीपी सिंह की तरफ से सोमवार को पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता यूआर ललित मौजूद रहे। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से मुकुल रोहतगी पेश हुए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने के बाद माना जा रहा है कि जीपी सिंह को सरेंडर करना पड़ेगा। बताया जा रहा है कि रायपुर पुलिस ने भी उनकी गिरफ्तारी की तैयारियां शुरू कर दी हैं।