छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 जून 2026 को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में शासकीय विद्यालयों में प्रतिदिन सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र, शांति मंत्र और भोजन मंत्र का अनिवार्य आयोजन करने के निर्देश थे। इस आदेश को अब छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता डॉ. आमिर खान ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह आदेश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28 की भावना के विपरीत है। यह अनुच्छेद राज्य द्वारा पूर्णतः वित्तपोषित शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक अनुष्ठानों के संचालन पर प्रतिबंध लगाता है।
डॉ. खान ने बताया कि यह आदेश अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) को भी प्रभावित करता है। इसके साथ ही यह अनुच्छेद 21 (गरिमामय जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) से प्रदत्त सांविधानिक संरक्षण को भी प्रभावित करता है। उन्होंने जोर दिया कि विद्यालय शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांविधानिक मूल्यों का केंद्र होना चाहिए। यह किसी विशेष धार्मिक परंपरा के प्रचार का माध्यम नहीं बनना चाहिए। संविधान प्रत्येक नागरिक की धार्मिक स्वतंत्रता और राज्य की धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करता है।
अधिवक्ता डॉ. आमिर ख़ान ने तर्क दिया कि उनका उद्देश्य किसी धर्म का विरोध करना नहीं है। उनका लक्ष्य संविधान की सर्वोच्चता तथा सभी विद्यार्थियों के समान अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का केंद्र वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांविधानिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। किसी विशेष धार्मिक परंपरा का प्रचार इसका माध्यम नहीं होना चाहिए।
याचिका में उच्च न्यायालय से यह प्रार्थना की गई है कि उक्त आदेश को असंवैधानिक घोषित किया जाए। इसे तत्काल निरस्त करने की मांग भी की गई है। इसके अतिरिक्त, याचिका में आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का भी अनुरोध किया गया है। यह याचिका सांविधानिक सिद्धांतों के संरक्षण पर केंद्रित है।