नृत्य के जरिए अपनी संस्कृति को तेलंगा समाज ने प्रदर्शित किया।
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छत्तीसगढ़ में बीजापुर के कोतापाल में आदिम तेलंगा समाज का तीन दिवसीय महासम्मेलन मंगलवार को संपन्न हो गया। इसमें 22 गांव से करीब 10 हजार लोग और तेलंगा समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान अपनी संस्कृति की प्रदर्शनी लगा कर अपने रहन सहन को प्रदर्शित किया गया। वहीं पारंपरिक नृत्य सहित खेती, आखेट और खान पान का जीवंत प्रदर्शन किया। सम्मेलन में समाज की ओर से उनकी जाति पर अनुसंधान की मांग रखी गई। बस्तर में निवासरत ये समाज कई दशकों से आदिवासी वर्ग में शामिल किए जाने की मांग कर रहा हैं।
तेलंगा समाज के अध्यक्ष आदिनारायण पुजारी ने कहा की हमारी संस्कृति और रीति रिवाज़ जनजाति समुदाय की तरह है। हमे पिछड़े वर्ग में शामिल कर दिया गया है, जो कि उचित नहीं है। इस लिए हम तेलंगा जाति पर अनुसंधान की मांग कर रहे हैं, ताकि हमारे लोगों को उचित आरक्षण का लाभ मिल सके। कार्यक्रम में विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि तेलंगा समाज यहां कई पीढ़ियों से निवासरत है। मैने आज यहां लगे प्रदर्शनी में देखा है कि तेलंगा समाज आदिम समुदाय के रहन सहन, जड़ी बूटियों के ज्ञान सहित अन्य कार्य भिन्न नहीं है। प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल को जिले के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा के साथ मिल कर तेलंगा समाज के वर्षों पुरानी मांग को पहुंचाई जाएगी।