विकास के प्रति नवीन दृष्टिकोण लेकर सरकार ने सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की थी, लोकसभा चुनाव कुछ ही महीने में होने हैं सांसद तरह-तरह से अपना पीआर बढ़ाने में लगे हुए हैं। कांकेर लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत बालोद जिले का सांसद आदर्श ग्राम अरमरी कला जहां पर महज तीन दिन पहले ही सांसद आदर्श ग्राम का बोर्ड लगाया गया है। गांव के सरपंच सहित आम जनता ने संसद के गांव के प्रति रवैया के लेकर कड़ी आलोचना की है ग्रामीणों का आरोप है कि, सासंद मोहन मांडवी इस रास्ते से कई बार गुजरते हैं परंतु अपने गोद लिए हुए ग्राम का सुध तक नहीं लेते।
पूरे मामले पर सांसद मोहन मंडावी का कहना है कि आदर्श गांव के रूप में हमने गोद लिया था, लेकिन यहां सभी चीजों को करना सरपंच का काम होता है सरपंच को आना चाहिए उन्होंने कहा इसकी सारी जिम्मेदारी सरकार की होती है, उन्होंने इसके लिए कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया उन्होंने कहा कि इसे मोदी का गांव बोलकर जानबूझ कर कांग्रेस वालों ने उपेक्षित किया है। अब सवाल यह उठता है कि रामायणी सांसद होने का खिताब प्राप्त कर चुके मोहन मांडवी क्या रामचरितमानस के भरोसे एक बार फिर से टिकट लेकर आएंगे और टिकट लेकर आ भी गए तो क्या वह जीत पाएंगे। यह गांव वैसे तो शुरू से ही विकसित गांव की श्रेणी में आता है यहां पर विद्यालय से लेकर महाविद्यालय पहले से ही बने हुए हैं।
ग्राम के सरपंच तीजू राम मंडावी ने कहा कि जब हमारे गांव को सांसद आदर्श गांव के नाम पर प्रस्तावित किया गया तो हमें लगा कि गांव का चहुमुखी विकास होगा परंतु सांसद कुछ बार तो आए पर गांव को विकास की दृष्टिकोण से हमेशा ऊपेक्षित रखा, हमने तालाब सौंदर्यकरण से लेकर यात्री प्रतीक्षालय और भी मूलभूत समस्याओं को लेकर लगातार सांसद मोहन मांडवी को दस्तावेज देते रहे परंतु उन्होंने हमारी बातों को सिरे से नकार दिया।
सांसद प्रतिनिधि ने भी कह दी बड़ी बात
सांसद प्रतिनिधि वासुदेव मारकण्डे ने कहा कि सांसद आदर्श ग्राम का एक अलग पहचान होता है। वह पहचान इस गांव को कभी मिल ही नहीं पाई और विकास जो है वह लोगों के बीच दिखता है। जब सांसद जीतकर आए तो उन्होंने इस गांव को अपना गोद ग्राम बनाया, हमें बड़ी खुशी हुई मुझे प्रतिनिधि बनाया गया परंतु उसके बाद उनकी कृपादृष्टि इस गांव पर बेहद कम रही। बहरहाल सांसद मोहन मांडवी गांव-गांव रामचरितमानस बांट रहे हैं लेकिन इस चुनाव में यह देखना लाजमी होगा कि प्रभु श्रीराम के सहारे वे टिकट पाने और जीतने में कामयाब होत हैं या नहीं।