शहर से करीब 12 किमी दूर स्थित है मंदिर
दरअसल, शहर से करीब 12 किमी दूर स्थित गंगरेल बांध के किनारे मां अंगारमोती विराजित हैं। मान्यता के अनुसार दिवाली के बाद आने वाले पहले शुक्रवार को यहां मड़ई मेला लगता है। इस मेले में दूर-दूर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यहां उन्होंने वनदेवी अंगारमोती के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। मड़ई मेले में करीब 52 गांवों के देची-देवता इस बार शामिल हुए। लोगों का मानना है कि माता से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है।
मान्यता जिस पर बैगा चढ़े उसे मिलता है मां का आशीर्वाद
इस बार यहां 300 से ज्यादा महिलाएं संतान प्राप्ति और मन्नत मांगने पहुंची थी। महिलाएं मंदिर के सामने हाथ में नारियल, अगरबत्ती, नींबू लिए कतार में खड़ी रहीं। फिर एक-एक कर पेट के बल जमीन पर लेट गईं और उनके ऊपर से चलकर बैगा आगे बढ़ने लगे। बताया जाता है कि यहां तमाम बैगा आते हैं, जिन पर देवी सवार होती हैं। ये लोग झूमते, बेसुध से मंदिर की ओर बढ़ते हैं। चारों ओर ढोल-नगाड़े बजते रहेते हैं। उनको आता देख कर ही महिलाएं पेट के बल लेटती हैं। मान्यता है कि जिस भी महिला के ऊपर बैगा का पैर पड़ता है, उसे संतान के रूप में माता अंगारमोती का आशीर्वाद मिलता है।