नाग ने आगे कहा कि दंतेवाड़ा में कांग्रेस पार्टी की विचारधारा बची ही नहीं है। एक परिवार की विचार धारा से कार्यकर्ताओं का भविष्य पार्टी में तय किया जा रहा है। विधानसभा चुनाव हेतु पार्टी के 19 दावेदारों के साथ मैंने भी अपनी दावेदारी पेश की थी। पार्टी ने दावेदारों के सर्वे रिपोर्ट को टिकट तय करने का सर्वोच्च आधार माना लेकिन दंतेवाड़ा विधानसभा के लिए उम्मीदवार तय करते समय विधायक परिवार की नकारात्मक सर्वे रिपोर्ट को दरकिनार कर दिया गया।
अन्य दावेदारों की सकारात्मक सर्वे रिपोर्ट को दरकिनार कर पुनः विधायक परिवार से छविन्द्र कर्मा को टिकट दिया गया। इन दो कार्यकालों में दंतेवाड़ा की जनता ने परिवार से एक विधायक नहीं बल्कि पांच-पांच विधायकों को सहन किया। शहीद महेंद्र कर्मा एवं दिवंगत दीपक कर्मा हमेशा पार्टी कार्यकर्ताओं एवं आमजनों के सुख दुःख में खड़े रहे और उनके जाने के बाद कर्मा परिवार सिर्फ सत्ता का दुरुपयोग करते हुए जनता के शोषण में लगा रहा। वर्तमान कांग्रेस प्रत्याशी छविंद्र कर्मा 2018 में अपनी मां देवती कर्मा के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतर रहे थे। नामांकन फार्म तक ले लिया था।