राजधानी रायपुर के खरोरा थाने क्षेत्र में एक युवक ने वन्यजीव पैंगोलिन को छिपाकर अपने घर में रखा था। इस जीव की कीमत लगभग 8 लाख रुपए आंकी गई है। युवक वन्यजीव सालखपरी (पेंगोलिन) को बेचने के फिराक में ग्राहक ढूंढ रहा था। इस संबंध में पुलिस को जानकारी मिली। उन्होंने घर में धावा बोला। मौके पर जीव को जब्त कर युवक को गिरफ्तार किया गया।
घर में छिपाकर रखा था 8 लाख का पेंगोलिन
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पूरा मामला खरोरा थाने क्षेत्र का है, जहां पुलिस टीम को जानकारी मिली थाने क्षेत्र के ग्राम बुढ़ेनी निवासी एक व्यक्ति अपने घर में जीवित सालखपरी (पेंगोलिन) रखा है। इसे बचने के लिए ग्राहक की तलाश कर रहा है। पुलिस को सूचना मिलने पर घर की तलाशी ली। मकान में घटना में संलिप्त एक युवक उपस्थित मिला। पूछताछ में अपना नाम सतीश बताया।
15 किलोग्राम पेंगोलिन की कीमत 8 लाख रुपए
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पुलिस ने कमरे की तलाशी ली। इस पर कमरे में जीवित वन्यजीव सालखपरी (पेंगोलिन) होना पाया गया। इस दौरान ग्राम बुढे़नी, थाना खरोरा, जिला रायपुर निवासी आरोपी सतीश उर्फ परदेशी पारधी 27 साल को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से जीवित 15 किलोग्राम वन्यजीव नर सालखपरी (पेंगोलिन) को जब्त किया गया। इसकी कीमत लगभग 8 लाख रुपए आंकी गई है।
दुनियाभर में वन्य जीवों की अवैध तस्करी के मामले में अकेले 20 फीसदी योगदान पैंगोलिन का है
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इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के मुताबिक, दुनियाभर में वन्य जीवों की अवैध तस्करी के मामले में अकेले 20 फीसदी योगदान पैंगोलिन का है। यह एक ऐसा जानवर है, जिसकी तस्करी पूरी दुनिया में सबसे अधिक हो रही है। खासतौर पर चीन में इस जानवर का अधिक डिमांड है। क्योंकि इसके खाल और मांस से पारंपरिक दवाइयां बनाई जाती हैं।
पैंगोलिन स्तनधारी जीवों की श्रेणी में आता है।
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सांप, छिपकली की तरह दिखने वाला पैंगोलिन स्तनधारी जीवों की श्रेणी में आता है। दशकों से इस जीव की दुनियाभर में तस्करी हो रही है। इस जीव से बनने वाली दवाएं काफी महंगे दामों पर बिकती हैं। हालात ऐसा हो गया है कि अब पैंगोलिन विलुप्त होने वाले जीवों की श्रेणी में पहुंच गए हैं।
एक किलो पैंगोलिन के मांस की कीमत 27 हजार
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बता दें कि पैंगोलिन शर्मीले प्रवृति का जीव है, जो धरती पर लगभग 60 मिलियन सालों से पाए जाते हैं। ये जीव चींटियां खाकर गुजारा करते हैं। शरीर पर कड़ी और सुनहरी-भूरी स्केल्स वाले इन जीवों का मांस भी खूब शौक से खाया जाता है। एक किलो पैंगोलिन के मांस की कीमत करीब 27 हजार रुपए तक होती है। वेट मार्केट में दूसरे कम कीमत के सस्ते जीवों के साथ पैंगोलिन नहीं बिकता, बल्कि महंगे रेस्त्रां ही इसे बेचते या पकाते हैं।
पैंगोलिन से बनती है कई प्रकार की दवाई
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इस जीव का दूसरा सबसे बड़ा इस्तेमाल ट्रेडिशनल चाइनीज मेडिसिन बनाने में होता है। पैंगोलिन के मांस से अलग दवाएं बनती हैं, तो इसके स्केल्स से अलग किस्म की दवा बनती हैं। हर दवा का उपयोग अलग बीमारी के लिए होता है। पैंगोलिन के स्केल्स यानी शरीर की ऊपरी कड़ी परत से बनने वाली दवाएं चॉकलेट के बार की तरह दिखती हैं, लेकिन काफी कठोर होती हैं। इसे गर्म पानी या अल्कोहल में घोलकर पिया जाता है।