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मां लक्ष्मी पूजा: कमल के फूल और कमल गट्टा से कीजिए मां लक्ष्मी की पूजा, होगी धन की वर्षा

Mon, 24 Oct 2022 01:12 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़।

सार

श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि सुबह उठकर मां लक्ष्मी का ध्यान करना चाहिए। दिन में पितरों का पूजन करने के बाद पितरों के निमित्त ब्राह्मण को भोजन और दक्षिणा देना चाहिए। 
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maa laxmi - फोटो : istock
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विस्तार
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श्री महालक्ष्मी पूजन में कमल के फूल का विशेष महत्व है। मां लक्ष्मी आसन कमल का फूल है। शास्त्र में ऐसा माना गया है कि यदि कमल के फूल से और कमल गट्टा से मां लक्ष्मी की पूजा की जाए तो धन की वर्षा के साथ सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। यह बात पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही।

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उन्होंने कहा कि लक्ष्मी का वाहन उल्लू है। उल्लू को रात में दिखाई नहीं देता है इसलिए कार्तिक अमावस्या के दिन मां लक्ष्मी की रात्रि में पूजा का विधान है। इस व्रत की देवी लक्ष्मी हैं। उप देवता भगवान नारायण हैं। इसमें गौरी गणेश की पूजा, देहरी पूजा, कलम और दावात की पूजा, सरस्वती पूजन, कुबेर पूजन के साथ तराजू पूजन का विधान है।

श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि सुबह उठकर मां लक्ष्मी का ध्यान करना चाहिए। दिन में पितरों का पूजन करने के बाद पितरों के निमित्त ब्राह्मण को भोजन और दक्षिणा देना चाहिए। प्रदोष काल में मां लक्ष्मी, गौरी गणेश की स्थापना कर कमल या गुलाब के फूल से आवाहन करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि मां का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। उसके बाद गंगाजल से स्नान कराने के बाद लक्ष्मी को कमल के फूल और गणेश जी को गुलाब के फूल पर आसन देना चाहिए। कमलगट्टा चढ़ाकर धूप दीप दिखाने के बाद फल प्रसाद चढ़ाएं। कलश पूजन और नवग्रह पूजन करें। हो सके तो रात में विष्णु सहस्रनाम और कनकधारा स्त्रो का पाठ करें। घी और सरसों का या काले तील के तेल का अखंड दीप जलाएं।

दिवाली पर पूजा के लिए शाम में स्थिर लग्न 20 मिनट
सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारयण मिश्र का कहना है कि दिवाली पूजन में शाम में स्थिर लग्न 20 मिनट का है। यह शाम छह बजकर 59 मिनट से लेकर शाम सात बजकर 19 मिनट तक का है। दीपावली 24 अक्टूबर को है। 24 अक्टूबर को चंडीगढ़ में 5 बजकर 43 मिनट पर सूर्यास्त होगा।

अमावस्या तिथि 24 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर आरंभ हो रहा है। मेष लग्न, चर की चौघड़िया और प्रदोष काल शाम सात बजकर 20 मिनट तक रहेगा। ऐसे में व्यापार में लाभ के लिए फैक्टरी में 7 बजकर 20 मिनट तक लक्ष्मी गणेश की पूजा कर लेनी चाहिए।

इसके बाद यानि सात बजकर 20 मिनट के बाद रोग की चौघड़िया होगी। यह अशुभ है। घर में पूजन के लिए स्थिर लग्न (वृष) शुभ माना गया है। यह लग्न शाम 6 बजकर 59 मिनट से लेकर शाम सात बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इस समय तक दिवाली पूजन, कुबेर पूजन, बहीखाता पूजन शुभ रहेगा।

रात्रि पूजन
डॉ. लाल बहादुर दुबे ने कहा कि रात 10 बजकर 35 मिनट से रात 12 बजकर 12 मिनट तक लाभ की चौघड़िया एवं कर्क लग्न में दीपावली पूजन के बाद श्री सूक्त का पाठ, कनकधारा स्त्रोत विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से व्यापार में लाभ धन की उन्नति और घर में सुख शांति और समृद्धि आती है।

महानिशा काल
सेक्टर- 30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी पंडित श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि रात 10 बजकर 55 मिनट से रात एक बजकर 55 मिनट तक महानिशा काल रहेगा। इस काल में लाभ की चौघड़िया रहेेगी। यह अत्यंत शुभ है। इस समय में काली पूजन, यंत्र, तंत्र और मंत्र की क्रियाओं का प्रयोग के लिए साधना और हवन पूजन किए जाते हैं।

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