चंडीगढ़। कोरोना और इनफ्लुएंजा के बढ़ते मरीजों के बीच एडिनोवायरस का खतरा बढ़ने लगा है। एक साथ तीन वायरस लोगों पर अलग-अलग तरह से चपेट में ले रहे हैं। डॉक्टर भी इनके लक्षणों के कारण भ्रम में पड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तीनों संक्रमण के लक्षण लगभग एक जैसे हैं। चिंता की बात यह है कि एडिनोवायरस खास तौर पर नवजात बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। इन संक्रमण से लोगों के फेफड़े के साथ गले की स्थिति खराब हो रही है। ज्यादातर मरीज आवाज बंद होने की शिकायत लेकर अस्पतालों की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इलाज के साथ संक्रमण वाले मरीजों की जिनोम सीक्वेंसिंग व वायरोलॉजी स्टडी भी जरूरी है ताकि संक्रमण के मुख्य कारण की जानकारी पाई जा सके।
जीनोम के साथ वायरोलॉजी स्टडी जरूरी
वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सलाहकार डॉ. आरएस बेदी ने बताया कि कोविड-19 और इन्फ्लुएंजा के बीच एडिनोवायरस के बढ़ते खतरे को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है। इन तीनों संक्रमण के मरीजों को चिन्हित करने के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग के साथ वायरोलॉजी स्टडी बेहद जरूरी है। डॉ. बेदी ने बताया कि वायरोलॉजी स्टडी प्राइवेट सेक्टर में बेहद महंगा है। ऐसे में प्रशासन को इसकी जांच के लिए सरकारी संस्थान में तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि संक्रमण के बढ़ते स्तर का समय रहते पता लगाकर उसे नियंत्रित करने के उपाय पर तेजी से काम किया जा सके।
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नवजात पर दें विशेष ध्यान
भारतीय बाल अकादमी की सदस्य व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन बवेजा का कहना है कि एडिनोवायरस का संक्रमण खास तौर पर नवजात बच्चों को ज्यादा शिकार बना रहा है। ऐसे में छोटे बच्चों में होने वाले वायरल इंफेक्शन को लेकर माता-पिता सचेत रहें। डॉ. गुंजन ने बताया कि एडिनोवायरस के संक्रमण के कारण 24 से 48 घंटे के बीच नवजात वेंटिलेटर पर पहुंच रहे हैं इसलिए बच्चों में साफ सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
बुखार, गले में दिक्कत, सांस नली में सूजन, खांसी, डायरिया, आंखों में गुलाबीपन, पेट में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, आंखों के आसपास सूजन और उल्टी होना जैसे लक्षण मरीज के संक्रमित होने का इशारा करते हैं।
संक्रमण बेहद आसान, ऐसे करें बचाव
एडिनोवायरस कई तरह के वायरस का समूह है, जो आंख, सांस नली, फेफड़े, आंत, नर्वस सिस्टम और यूरिनरी ट्रैक्ट को संक्रमित करता है। इसके लक्षण फ्लू जैसे होते हैं। यह किसी भी उम्र वर्ग के लोगों को संक्रमित कर सकता है। इसका संक्रमण साल में कभी भी हो सकता है। इसका वायरस संक्रमित मरीज को छूने, हाथ मिलाने, संक्रमित चीजों को पकड़ने और हवा में मौजूद खांसी के ड्रॉप्लेट्स से फैलता है इसलिए साफ-सफाई ही बचाव का सबसे बेहतर उपाय है। मरीज के संपर्क में आने के बाद अपने हाथ जरूर धोएं। कुछ एडिनोवायरस मरीजों के मल के जरिए भी फैलते हैं खासतौर पर संक्रमित बच्चे के डायपर को बदलने के दौरान। इसके अलावा इसका वायरस पानी (स्वीमिंग पूल) के जरिए भी फैल सकता है।