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नहीं मिलेगी राहत.. अक्तूबर तक बंद रहेगा सिविल अस्पताल-45 का लेबर रूम

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चंडीगढ़। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर सेक्टर- 45 के सिविल अस्पताल के लेबर रूम में अलग कोविड यूनिट बना दिया गया है। यहां दो महीने से प्रसव की सुविधा बंद है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह व्यवस्था अक्तूबर तक ऐसे ही रहेगी। उसके बाद कोरोना के केस न बढ़ने पर पुरानी व्यवस्था बहाल करने का निर्णय लिया जाएगा। महामारी की आशंका में किए गए इस बदलाव से क्षेत्र की महिलाएं बेहद परेशान हैं। स्थिति यह है कि गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच और प्रसव पीड़ा पर यहां-वहां चक्कर काटना पड़ रहा है।
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इसलिए दो महीनों से बंद है लेबर रूम
दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के लिए अलग कोविड यूनिट बनाने का निर्णय लिया। इसे ध्यान में रखते हुए ऐसे स्थान की तलाश की गई जो यूनिट के लिए उपयुक्त हो। इसके बाद सेक्टर- 45 स्थित सिविल अस्पताल का लेबर रूम को चिह्नित किया गया, क्योंकि वहां ऑक्सीजन की आपूर्ति के साथ ही कोविड के मरीजों के इलाज के अन्य मानकों की पूर्ति हो रही थी। इसके बाद यूनिट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए दो महीने पहले लेबर रूम को बंद कर दिया गया है।
क्या कहती हैं महिलाएं
पूर्ववत हो संचालन, ताकि घर के आसपास मिले उपचार
कोविड के लिए स्वास्थ्य विभाग को एक अलग कोविड अस्पताल घोषित कर देना चाहिए। एक-एक यूनिट के लिए पूरे अस्पताल की सुविधा प्रभावित करने से न तो जनता को लाभ मिलेगा न ही विभाग को। सेक्टर- 48 और सेक्टर- 45 में अन्य सुविधाओं का संचालन पूर्ववत करना चाहिए, ताकि क्षेत्र के लोगों को घर के आसपास इलाज उपलब्ध हो सके।
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-योगांशिका बैधवान, हल्लोमाजरा
महिलाओं की पीड़ा को गंभीरता से समझे स्वास्थ्य विभाग
एक गर्भवती महिला के लिए रात के समय इलाज के लिए यहां से वहां जाना कितना मुश्किल होता है यह केवल वह ही समझ सकती है। स्वास्थ्य विभाग को भी उनकी समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। आने वाले समय की आशंका में वर्तमान में ही सुविधा से वंचित कर देना सही निर्णय नहीं हो सकता।
-मीनाक्षी चौधरी, सेक्टर- 49
लेबर रूम बंद किया जाना गलत, वैकल्पिक व्यवस्था हो
सेक्टर- 45 के पास स्थित बुडै़ल में रहने वाली गरीब और जरूरतमंद महिलाएं इलाज के लिए सिविल अस्पताल ही जाती हैं। वहां लेबर रूम बंद कर गलत किया गया है। इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए, क्योंकि उस स्थिति में एक महिला का यहां से वहां भटकना उसके व उसके बच्चे के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
-अनीता शर्मा, सेक्टर- 45
सरकारी इलाज के नाम पर किया जा रहा परेशान
मेरा पंजीकरण सेक्टर- 45 के सिविल अस्पताल में किया गया था। अब वहां प्रसव की सुविधा बंद हो जाने से मुझे जीएमएसएच- 16 भेज दिया गया। कार्ड बनावाने के लिए वहां से यहां आना पड़ा। एक दिन तबीयत बिगड़ी तो 45 से रात को जीएमएसएच- 16 भेज दिया। यहां आने पर सेक्टर- 22 के सिविल अस्पताल जाने को कह दिया गया। सरकारी इलाज के नाम पर परेशान किया जा रहा है।
अनु, सेक्टर 45
कोट
अक्तूबर पर तक जनता सहयोग करे
कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। यह अक्टूबर तक रहेगी। ऐसे में जनता को भी सहयोग करना होगा, तभी महामारी पर विजय मिलेगी। जहां तक परेशानी की बात है तो इलाज में किसी भी तरह की अनदेखी या लापरवाही क ी शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
-डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य
कोट-
क्या पुरानी व्यवस्था को बंद करना ही एकमात्र विकल्प है
महामारी से बचाव की व्यवस्था बेहद जरूरी है। लेकिन क्या उसके लिए पुरानी व्यवस्था को बंद करना ही एकमात्र विकल्प है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को इसे गंभीरता से सोचना होगा। अगर यही हाल रहा तो नॉन कोविड मरीज बिना इलाज के बेहद परेशान होंगे।
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-रजत मल्होत्रा, अध्यक्ष, सेक्टर- 45 रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन
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