अमृतपाल की दस्तारबंदी में शामिल हुए थे खालिस्तानी समर्थक
गांव रोडे में अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी में ऐसे संगठन के सदस्य भी शामिल हुए जिनका किसी न किसी रूप में खालिस्तानी दहशतगर्दी से संबंध रहा। मंच से भी खालिस्तानी नारे लगाए गए। बब्बर खालसा, प्रतिबंधित इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन और पूर्व में बैन रहे संगठनों के पुराने सदस्य भी इसमें दिखे।
आईएसआई की शह पर अमृतपाल को भेजा गया : कैप्टन
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार को खालिस्तान के मुद्दे पर कार्रवाई करने की जरूरत है। उन्होंने आशंका जताई कि दुबई निवासी अमृतपाल को पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई की शह पर पंजाब में फिर से खालिस्तान का मुद्दा भड़काने के लिए भेजा गया है। कैप्टन ने कहा कि अमृतपाल का परिवार दुबई में रहता है। पंजाब सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए कि इसकी मंशा क्या है। कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है। वह (पंजाब सरकार) कुछ नहीं कर रहे।
भिंडरांवाला का परिवार कर चुका है किनारा
दमदमी टकसाल के मुखी रहे संत जरनैल सिंह भिंडरांवाला के भतीजे जसबीर सिंह रोडे ने वारिस पंजाब दे जत्थेबंदी के मुखी अमृतपाल सिंह से किनारा कर लिया है। जसबीर सिंह ने कहा कि अमृतपाल सिंह की विचारधारा से उनका कोई लेना देना नहीं है। अमृतपाल भिंडरांवाला की जगह नहीं ले सकता। वो एक अलग शख्सियत थे। उन्होंने कभी भी खालिस्तान बनाने की मांग नहीं की थी।
श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई जरनैल सिंह रोडे ने कहा कि खालिस्तान अमृतपाल का अपना और उसकी जत्थेबंदी का एजेंडा हो सकता है। भिंडरांवाला परिवार इससे इत्तफाक नहीं रखता। उन्होंने कहा कि अमृतपाल यदि सिख धर्म के प्रचार प्रसार या अमृतपान की मुहिम चलाता है तो हम उसका साथ देंगे, लेकिन अलग खालिस्तान या राज्य की मांग का वह समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा कि संत जरनैल सिंह भिंडरांवाला ने भी कभी खालिस्तान की मांग नहीं की थी। वे हमेशा ही आनंदपुर साहिब मत्ते को लागू करने की मांग करते थे। इसके तहत राज्यों को अधिकार दिए जाने की वकालत थी, उसमें खालिस्तान की कोई बात नहीं थी।