हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
केंद्र सरकार ने जहां गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 10 दिन और गेहूं खरीद का एलान किया। उन्होंने कहा कि 16 मई से एक बार फिर गेहूं खरीद की जाएगी, जो 25 मई तक चलेगी। मुख्यमंत्री रविवार को यमुनानगर की जगाधरी अनाज मंडी में भाजपा की तरफ से आयोजित प्रगति रैली में पहुंचे थे, जहां उन्होंने किसानों की समस्या को देखते हुए एक बार फिर से गेहूं खरीद शुरू करने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस बार गेहूं का उत्पादन पिछले वर्षों की अपेक्षा कम हुआ है। यही कारण है कि काफी संख्या में व्यापारियों ने गेहूं का स्टॉक कर लिया। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि गेहूं का निर्यात नहीं किया जाएगा, ताकि देश के में गेहूं संकट और कालाबाजारी न हो। इस दौरान उन्होंने हरियाणा में प्लाईवुड उद्योग को बढ़ावा देने के लिए यमुनानगर में फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट बनाने की घोषणा की, जो इस तरह का प्रदेश का पहला इंस्टीट्यूट होगा और इस पर करीब 50 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इससे पहले उन्होंने यमुनानगर में 1064 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलान्यास किया।
जब सीएम ने दोबारा आकर मंच से की घोषणा
जिले को 1064 करोड़ रुपये की सौगात देने के बाद जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल भाषण खत्म कर स्टेज की तरफ लौट रहे थे। तभी यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने उन्हें फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट की बात याद दिलाई। इसके बाद सीएम ने दोबारा मंच से आकर घोषणा की।
सीएम बोले- यमुनानगर से है विशेष लगाव
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि यमुनानगर से उन्हें विशेष लगाव है। कारण कि जब घर परिवार छोड़कर समाजसेवा के लिए निकला तो उस दौरान यमुनानगर में छह साल तक रहा, जिसका अनुभव जीवन में उत्साह भरने वाला है। कहा कि इस इलाके के साथ जब भी कोई बात आई है तो उसे आगे बढ़कर किया है। यहां विकास कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।
विकास कार्यों को देख कांग्रेस का उठ रहा मरोड़: कंवरपाल
मंच से शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर ने न सिर्फ सरकार के विकास कार्यों का बखान किया, बल्कि कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में हरियाणा का बिना भेदभाव के समान रूप से विकास हो रहा है, जिसे देखकर कांग्रेस के पेट में मरोड़ उठ रहा है। उन्होंने कहा कि पॉपुलर का मूल्य पहले 250 से 300 रुपये प्रति किवंटल था लेकिन हमारी सरकार ने इसे 1400 रुपये प्रति क्विंटल किया है। वहीं हरियाणा देश में ऐसा पहला राज्य है, जहां पर स्कूल के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए टेबलेट वितरित किए जा रहे हैं।