एसजीपीसी चुनाव के लिए पहुंचीं बीबी जागीर कौर।
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान पद पर एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की लगातार दूसरी बार जीत के साथ शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने इस संस्था पर अपना वर्चस्व तो बनाए रखा लेकिन चुनाव में जिस तरह से मुकाबला हुआ, उसने शिअद की चिंता बढ़ा दी है।
एडवोकेट धामी जीतने के बावजूद पिछले साल के मुकाबले कम वोट हासिल कर सके जबकि बीबी जागीर कौर को उम्मीद से ज्यादा वोट मिले। एसजीपीसी की कार्यकारिणी में भी अब धामी गुट के 8 सदस्यों के अलावा तीन सदस्य बीबी जागीर कौर के गुट से होंगे।
इस दौरान, शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने धामी की प्रतिद्वंद्वी बीबी जागीर कौर की उम्मीदवारी को भगवा (भाजपा) पार्टी की एसजीपीसी में घुसपैठ करार देते हुए इस चुनाव को सियासी रंग देने का प्रयास किया है। एसजीपीसी के भगवाकरण की कोशिशों का आरोप लगाते हुए शिअद ने इस चुनाव में बीबी जागीर कौर की उम्मीदवारी का मुकाबला किया। इसका मुख्य कारण यह भी है कि चुनाव लड़ने के लिए शिअद से बगावत करने के बाद बीबी जागीर कौर को सबसे पहले संयुक्त अकाली दल के प्रधान सुखदेव सिंह ढींढसा का समर्थन मिला। ढींढसा पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन कर चुके हैं। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि बीबी जागीर कौर अब ढींढसा के संयुक्त अकाली दल में शामिल हो सकती हैं।
एसजीपीसी के इस चुनाव में प्रधान पद पर एडवोकेट धामी को 104 और बीबी जागीर कौर को 42 वोट मिले। पिछले साल चुनाव में धामी को 122 वोट मिले थे, जिनमें इस बार 18 वोट घटे हैं। बीबी जागीर कौर को 35 वोट मिलने का अनुमान शिअद ने ही लगा रखा था लेकिन उन्हें 42 वोट मिले हैं। यानी एसजीपीसी के सदस्यों में शिअद के समर्थकों की संख्या घटने लगी है और इस संस्था पर पार्टी की पकड़ कमजोर होने लगी है।
प्रधान पद के चुनाव के लिए बीबी जागीर कौर के नाम का प्रस्ताव एसजीपीसी सदस्य अमरीक सिंह ने पेश किया, जिसका अनुमोदन मिट्ठू सिंह काहनेके और गुरबख्श सिंह ने किया। इस चुनाव नतीजे से यह भी साफ हो गया है कि भविष्य में शिअद के लिए एसजीपीसी प्रधान का नाम ‘लिफाफे से’ निकालना संभव नहीं होगा। पार्टी के प्रत्याशी को चुनौती मिलने की परंपरा शुरू हो गई है।