हिमाचल प्रदेश के छह बार सीएम रह चुके वीरभद्र सिंह ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं। हिमाचल के 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के सीएम उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल को हराने वाले सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा के घर पहुंचे वीरभद्र सिंह ने पार्टी हाईकमान के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच जाना पड़ेगा, उनसे नए सिरे से राजनीतिक संबंध बनाने होंगे। चूंकि, कहीं न कहीं पार्टी के अधिकांश नेता राहुल के नेतृत्व में काम करने से हिचकिचा रहे हैं। बीते विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के लिए हाईकमान जिम्मेवार है। पार्टी हाईकमान ने विधानसभा चुनाव में ऐसे लोगों को टिकटें बांटी, जिनका लोग नाम तक नहीं जानते थे। इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ा।
विधानसभा चुनाव के समय पार्टी हाईकमान ने उनके सुझाए उम्मीदवारों को टिकट नहीं दी। उनकी सूची में अनेक वरिष्ठ व अनुभवी नेता शामिल थे। लेकिन हाईकमान ने उन्हें टिकट नहीं दिया। वीरभद्र सिंह एक बार फिर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह का नाम आने पर भड़क उठे। उन्होंने कहा कि सुक्खू अगर इतने ही महाबली हैं तो पार्टी हाईकमान उन्हें लोकसभा चुनाव में आजमा कर क्यों नहीं देख लेता।
वह निर्वाचित नहीं, मनोनीत अध्यक्ष हैं। लोकसभा चुनाव से पहले सुक्खू को हटाकर चुनाव के जरिए नया अध्यक्ष नियुक्त किया जाना चाहिए। पांच साल से अधिक समय सुक्खू को अध्यक्ष बने हो गया है, उन्हें पार्टी संविधान के मुताबिक हटा देना चाहिए। उन्होंने सुक्खू पर तंज कसते हुए कहा कि सुक्खू को कुर्सी से इतना प्यार हो गया है कि वह कुर्सी छोड़ ही नहीं रहे। लेकिन, एक दिन छोड़नी ही पड़ेगी। लोकसभा चुनाव को लेकर वीरभद्र सिंह ने साफ किया कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे।
चुनाव के लिए पार्टी तैयार हो न हो, वह तैयार
पार्टी चुनाव के लिए तैयार हो न हो, वह चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आगामी चुनाव को लेकर इस बार वह हाईकमान को कोई सुझाव नहीं देंगे, पार्टी जिसे भी टिकट देगी, उसके साथ झंडा उठाकर चलेंगे। पार्टी को टिकट देते समय यह देखना चाहिए कि जीतने वाला कौन है। हारने वालों को टिकट देकर बाद में चिल्लाने से कोई फायदा नहीं। हिमाचल में पार्टी की अंतरकलह समय के साथ खत्म हो जाएगी। सुक्खू को हटाने के लिए वह कई बार हाईकमान को कह चुके हैं। इस दौरान उनके साथ विधायक राजेंद्र राणा, अभिषेक राणा इत्यादि मौजूद रहे।
एक मत-एक चुनाव को नकारा
पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी के एक मत-एक चुनाव सिद्घांत को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मोदी की लहर अब खत्म हो चुकी है। लोग भाजपा के झूठे वादों और जुमलेबाजी में फंसने वाले नहीं हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा को हार झेलनी पड़ेगी। मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव में लोगों से जो वादे किए थे, वे आज तक पूरे नहीं हुए। मोदी लोगों को केवल सपने दिखाकर वोट हासिल करना चाहते हैं।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग और अपने समय पर ही होने चाहिए। वीरभद्र सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ पर हिमाचल का कोई हक नहीं है। संवैधानिक तौर पर देखा जाए तो एक समय था जब पंजाब की राजधानी भी शिमला हुआ करती थी, लेकिन बाद में पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ बन गई और हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला बन गई। इस लहजे से चंडीगढ़ पर हिमाचल का कोई हक नहीं बनता।