सेक्टर-31 स्थित 3 बीआरडी एरिया में सीवरेज की सफाई करने मैनहोल में उतरे तीन कर्मचारियों की मौत ने जहां नगर निगम की लापरवाही की पोल खोल दी, वहीं तीन परिवारों को जिंदगी भर के लिए दर्द दे दिया। तीनों परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। तीनों कर्मचारी एक रस्सी और कमजोर सीढ़ी के सहारे मैनहोल में उतरे, मगर उसके बाद बाहर नहीं आए।
अगर कर्मचारियों को सेफ्टी उपकरण दिए जाते तो शायद हादसा न होता। तीनों के शवों को फायर विभाग के कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला। यही नहीं सीवरेज की सफाई करने आए चार कर्मचारियों में से तीन तो नए ही थे, जिन्हें काम की ज्यादा जानकारी भी नहीं थी।
शरीर में भर गया था पानी
सूचना पाकर मौके पर पीसीआर पुलिस, थाना पुलिस व फायर विभाग के कर्मचारी पहुंच गए। इसके बाद फायर कर्मचारियों ने 45 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला। उनके शरीर में काफी पानी भर गया था। तीनों को जीएमएसएच-16 ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत बताया।
...और वे एक-एक कर गड्ढे में समाते रहे
मृतकों के साथी भूरा ने बताया कि मैंने, प्रेमपाल व अशरफ ने इससे पहले कभी इतनी बड़ा काम नहीं किया था, ठेकेदार के पास धान सिंह ही काम करता था। हम तीनों नए थे। शनिवार सुबह करीब 10 बजे हम सीवरेज की सफाई के लिए आए। चारों ने काम शुरू किया।
कुछ देर के बाद धान सिंह ने कहा कि वह पहले जाकर देख लेता है कि सीवरेज की स्थिति क्या है। लेकिन, मैनहोल में जाने के बाद वह नहीं लौटा। कुछ देर बाद प्रेमपाल ने कहा कि कुछ सामान लेकर जाते हैं। दोनों सफाई में लग जाएंगे। आप लोग भी आने की तैयारी कीजिए। कुछ देर बाद मैंने किसी काम के लिए उनको आवाज लगाई।
काफी देर तक कोई जवाब नहीं मिला तो मैंने सोचा कि अंदर कोई गड़बड़ी हो गई है। मैं सामान की सेटिंग कर रहा था कि इसी दौरान अशरफ ने कहा कि वह चेक करके आता है। इसके बाद अशरफ भी दोनों की तरह वापस नहीं लौटा। जब तीनों नहीं लौटे तो मैं डर गया।
बाद में रखे उपकरण
कर्मचारियों के पास सिर्फ एक रस्सी थी। जो सीढ़ी थी, वह भी काफी कमजोर थी। नियम के अनुसार जब भी इस तरह के मैनहोल की सफाई का काम होता है तो सुपरविजन के लिए नगर निगम के अधिकारी मौजूद होने चाहिए, लेकिन मौके पर निगम अधिकारी नहीं थे।
भाजपा पार्षद सतीश कैंथ का कहना है कि वह घटना की सूचना मिलती ही पहुंच गए थे। जब वह पहुंचे तो वहां पर कोई भी सेफ्टी उपकरण नहीं थे, लेकिन कुछ देर बाद वहां पर किसी ने पानी की बाल्टी समेत ऑक्सीजन सिलेंडर रख दिया। उनका कहना है कि ठेकेदार पर एक मौत पर 10 लाख का जुर्माना लगाना चाहिए और यह राशि मृतक के परिवार को दी जानी चाहिए।
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