मौसम खराब होने के चलते मंगलवार को सुबह तीन घंटे देरी से बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षांत समारोह शुरू हुआ। इसमें बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आज विचार हैं, संकट नहीं है। जो हो रहा है वह आपके लिए ही हो रहा है। पहले और अब के समय में बदलाव आ चुका है। उन्होंने सीख देते हुए कहा कि हमें उतने ही प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करना चाहिए, जितने की जरूरत होती है।
अस्थल बोहर स्थित बाबा मस्तनाथ विवि के सभागार में उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र सुरक्षा, अन्न उत्पादन या सीमाओं की सुरक्षा की बात हो तो हरियाणा की राष्ट्रभक्ति सर्वोपरि है। यहां बलिदान देने में भी पीछे नहीं हटते हैं। दीक्षांत समारोह में 2286 विद्यार्थियों को उपराष्ट्रपति ने डिग्रियां और मेडल प्रदान करते हुए कहा कि शिक्षा में आगे बढ़ने की शक्ति होती है।
यह विद्यार्थियों के जीवन में बहुत अहम पल होता है, जिसे उन्हें कभी नहीं भूलना चाहिए। आज के बाद यहां से निकल कर विद्यार्थियों को राष्ट्र व समाज को सर्वोपरि रखते हुए सेवा भाव से समाज के लिए कार्य करना चाहिए। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय देश के लिए संस्कारवान और देशभक्ति से परिपूर्ण युवाओं को शिक्षित कर रहा है और उन्हें खुशी है कि कुलाधिपति महंत बालक नाथ योगी ने जानकारी दी है कि जल्द ही यहां सैनिक स्कूल भी खोला जा रहा है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे आज शपथ लें कि संविधान में लिखित मौलिक कर्तव्यों पर भी उतना ही बल देंगे, जितना मौलिक अधिकारों पर दिया जाता है। मौलिक कर्तव्यों का पालन करना आवश्यक है, इसके सकारात्मक परिणाम आएंगे। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति के साथ भारत की सेकंड लेडी डॉ. सुदेश धनखड़ भी विद्यार्थियों को अपना आशीर्वाद देने पहुंची थी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी उपस्थित रहे।
प्रदेश की नीतियों को सराहा
उपराष्ट्रपति ने मंच पर प्रदेश के खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि पहले अगर बच्चे खेल में रुचि रखते थे तो उनके अभिभावक खेलने की बजाय उन्हें पढ़ाई करने के लिए डांटते थे, लेकिन आज हरियाणा के खिलाड़ियों ने खेल क्षेत्र में जो मुकाम हासिल किया है, उससे आज अभिभावक खेल को एक कॅरिअर के रूप में देखते हैं। आज भारत में अवसरों की कोई कमी नहीं है। भारत अवसरों और निवेश के मामले में आज ग्लोबल लैंड बन गया है। भारत आज विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। जिन्होंने भारत पर राज किया है, उनको भी हमने पीछे छोड़ दिया है। अगर भारत इसी तेजी से विकास करता रहा तो जल्द ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा।
स्वयं का दिया उदाहरण
विद्यार्थी देश का भविष्य हैं। उन्हें अपनी प्रतिभा को कम नहीं आंकना चाहिए और नवाचारों से संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि सैनिक स्कूल, चितौड़गढ़ में अगर उन्हें स्कॉलरशिप नहीं मिली होती तो वे कानून की अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते। वकालत के लिए लाइब्रेरी खोलने के लिए जब वे बैंक से 6 हजार रुपये का ऋण लेने गए तो बैंक मैनेजर ने मदद की, लेकिन आज केंद्र सरकार द्वारा किए गए कार्यों की बदौलत युवाओं को स्टार्ट-अप खोलने के लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है। 1989 में जब वे सांसद बने थे तो उस समय सांसद के नाते 50 गैस कनेक्शन हर वर्ष मिलते थे। आज 18 करोड़ गैस कनेक्शन फ्री देकर केंद्र सरकार ने एक नया आयाम स्थापित किया है। इतना ही नहीं, 1 अप्रैल, 2020 से 80 करोड़ लोगों को फ्री राशन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 138 करोड़ जनसंख्या को कोरोना की वैक्सीन की दोनों डोज के साथ-साथ बूस्टर डोज लगाने का जो कीर्तिमान स्थापित किया है। 34 वर्षों के बाद नई शिक्षा नीति-2020 बनाकर जो बदलाव लाने का काम किया है, वह अपने आप में किसी क्रांति से कम नहीं है।
उपराष्ट्रपति युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत : मुख्यमंत्री
कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि उपराष्ट्रपति केवल राजनेता ही नहीं बल्कि अर्थशास्त्री भी हैं और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। हर समस्या को एक अनुभवी व्यक्ति के रूप में सुलझाने की उनकी कला से वे स्वयं भी प्रभावित हैं। बंगाल के राज्यपाल रहते हुए वहां की समस्याओं को जिस प्रकार से उन्होंने सुलझाया, शायद ही कोई और व्यक्ति ऐसा कर पाता। उनकी इसी काबिलियत पर आज वे उपराष्ट्रपति के पद पर हैं।
मुख्यमंत्री ने डिग्री प्राप्त विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज के बाद अपने जीवन में विद्यार्थी एक नई सीढ़ी चढ़ने जा रहे हैं और समाज के लिए सेवा भाव से कार्य करने के बाद ही वास्तविक सफलता का आनंद मिलेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षार्थ आइए-सेवार्थ जाइए के भाव से विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। आज का क्षण वे कभी न भूलें, क्योंकि डिग्री हासिल करने के बाद वे समाज व राष्ट्र के लिए कार्य करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महंत बालक नाथ योगी ने इस संस्थान को बड़े परिश्रम से सींचा है और यह संस्थान इसी प्रकार उन्नति करता रहे, यही कामना है।
हरियाणा में नई शिक्षा नीति को 2025 तक करेंगे लागू
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कार्यक्रम में कहा कि हमारे कार्यकाल के दौरान हरियाणा में शिक्षा क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। केंद्र सरकार द्वारा लागू नई शिक्षा नीति को वर्ष 2030 तक राज्यों में लागू करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन हम इसे वर्ष 2025 तक लागू करेंगे। आयुर्वेद में मानव शरीर को निरोगी रखने की कला है, जबकि एलोपैथ में बीमारी होने के बाद इलाज होता है। इसलिए एलोपैथी, आयुर्वेद, यूनानी इत्यादि पद्धतियों में एक ही डिग्री के लिए प्रयास किए जाएंगे।
हरियाणा में होंगी एमबीबीएस की 3050 सीटें
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि वर्ष 2014 में हरियाणा में एमबीबीएस की केवल 750 सीटें थी जो आज बढ़कर 1700 हो गई हैं। हम हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं, जिससे एमबीबीएस की सीटें 3050 हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि पंचकूला में आयुर्वेद का एम्स भी खोला जा रहा है। इसके अलावा गांव में आयुर्वेद के केंद्र भी खोले जाएंगे।
ये रहे मौजूद
उप राष्ट्रपति की धर्मपत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर, अलवर के सांसद एवं बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति महंत बालक नाथ योगी, राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा एवं कृष्ण पंवार, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़, पूर्व मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर, मुख्यमंत्री के ओएसडी (प्रचार) गजेंद्र फौगाट, मेयर मनमोहन गोयल, रोहतक मंडलायुक्त जगदीप सिंह, एडीजीपी ममता सिंह, उपायुक्त यशपाल, पुलिस अधीक्षक उदय सिंह मीणा, झज्जर के एसपी वसीम अकरम, अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्रपाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार लोहचब, हेमेंद्र सिंह मीणा व मेधा भूषण।