युवाओं में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है। हालात यह हैं कि अस्पतालों में बनाए गए नशा मुक्ति केंद्र के बेड कम पड़ रहे हैं। परिजनों को नशे के दलदल में फंसे अपनों को खोने का गम सता रहा है तो मरीज इस चंगुल से चाहकर भी नहीं छूट पा रहा। पीजीआई के नशा मुक्ति एवं उपचार केंद्र में साल दर साल मरीजों की संख्या बढ़ रही है। महज 5 साल में सेंटर का बजट 4 करोड़ से बढ़ाकर 15 करोड़ कर दिया गया है। वहीं 50 बेड वाली इस यूनिट में बेड की संख्या 100 करने की तैयारी है।
सेंटर में आने वाले मरीजों में इंजेक्शन के माध्यम से नशा करने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ मरीज तो नशे के इतने आदी हो चुके हैं कि वे एक दिन में हेरोइन के आठ से दस इंजेक्शन तक लेते हैं। ऐसे मरीजों के इलाज में नशे की डोज कम करने में काफी सावधानी बरतनी पड़ती है, क्योंकि आदत के अनुसार नशा न कर पाने पर वे खुद को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
ओपीडी में आने वाले मरीजों में हेरोइन का नशा करने वाले सबसे ज्यादा हैं। सेंटर के डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें कंट्रोल करने के लिए एडनॉक दवा का प्रयोग किया जाता है। यह दवा अन्य प्रकार के नशे को भी काबू करने में बेहद कारगर है, जिससे यहां सबसे ज्यादा एडनॉक की खपत होती है। सेंटर में 21 दिन तक भर्ती रहकर इलाज पूरा कराना होता है, लेकिन ज्यादातर मरीज यहां रुकना नहीं चाहते। इलाज के दौरान ही भाग जाते हैं। यूनिट में उनके मनोरंजन की पूरी व्यवस्था की गई है। उनके लिए स्पोर्ट्स ग्राउंड में बैडमिंटन, क्रिकेट खेलने के साथ ही जिम, कैरम और टीवी उपलब्ध कराया गया है।
परिजनों को सता रही अपनों की चिंता
पंजाब से अपने 19 साल के बेटे का इलाज कराने आई एक महिला ने बताया कि स्कूल में दोस्तों के साथ कब बेटे को नशे की लत लग गई पता ही नहीं चला। शुरू में तो वह अपना जेबखर्च इसमें उड़ाता था, जब लत बढ़ने लगी तो चोरी करने लगा। अब तो शराब पीकर घर आ जाता है, तोड़फोड़ करता है। उसके इलाज के लिए पीजीआई के चक्कर काट रहे हैं।
इसी तरह रोहतक से अपने पति का इलाज कराने आई 26 साल की युवती ने रोते हुए बताया कि उसे तो शादी के बाद पता चला कि पति को नशे की लत है। पीजीआई में दो बार आ चुके हैं लेकिन बेड खाली न होने के कारण भर्ती नहीं करा पा रहे हैं।
तेजी से बढ़ रही मरीजों की संख्या
साल ओपीडी इमरजेंसी भर्ती
2018-19 1874 1242 68
2019-20 5590 3525 279
नोट- पीजीआई के नशा मुक्ति केंद्र में 25865 मरीजों का इलाज चल रहा है, जिसमें 20275 पुराने और 5590 नए मरीज शामिल हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2017-19 के बीच नशा करने से 2,300 से ज्यादा लोगों की मौत की हुई है। मरने वालों में 30-45 आयु वर्ग के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है।
2020 में नशे से यहां इतनी हुई मौत
तमिलनाडु 205
पंजाब 186
हरियाणा 76
केरल 64
मध्यप्रदेश 40
यह हैं लक्षण
- नशे का आदी होने पर व्यवहार में परिवर्तन होना
- परिवार के बीच न रहकर चुपचाप सबसे अलग रहना
- बात-बात पर झूठ बोलना और रुपयों की मांग बढ़ जाना
- आंखों में लालिमा बने रहना और चेहरा शांत दिखना
- पढ़ाई में अचानक कमजोर होना
हेल्पलाइन नंबर से भी ले सकते हैं मदद
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय नशे की लत छुड़ाने वाले केंद्रों को चलाने के लिए देशभर के एनजीओ को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। मंत्रालय ने नशे की लत छुड़ाने के लिए 24 घंटे का एक राष्ट्रीय टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800110031 स्थापित किया है।
चंडीगढ़ में नशे के साथ बढ़ रहा अपराध भी
वर्ष केस गिरफ्तारी
2016 146 157
2017 240 244
2018 178 182
2019 201 201
2020 104 110
नशे की लत छुड़ाने के लिए चाहिए समय, पैसा और धैर्य
नशे की लत के लिए आनुवांशिक कारणों के साथ ही जीन भी जिम्मेदार हो सकता है। जहां तक 18 साल से कम उम्र में इसके बढ़ने की बात है तो उस दौरान दिमाग विकास की अवस्था में रहता है। उस उम्र में निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती है, जिसके कारण वे शौकिया तौर पर नशा करने लगते हैं। इस लत से छुटकारा पाने के लिए समय, पैसा और संयम तीनों होना बेहद जरूरी है। क्योंकि इसका इलाज कम समय में संभव नहीं है।
- डॉ. दमनजीत कौर, सदस्य, स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी, पंजाब
नशे की उपलब्धता पर रोक लगाना जरूरी
पंजाब में नशे पर रोक के लिए पांच साल पहले प्रिवेंशन प्लान बनाकर दिया गया था, जिसमें खासतौर पर स्कूल परिसर और उसके बाहर बरती जानी वाली सावधानियों पर फोकस किया गया है। इसके अलावा जहां भी नशे का स्तर तेजी से बढ़ रहा हो, वहां सबसे पहले उसकी उपलब्धता पर रोक लगाने का प्रयास करना होगा, तभी बचाव संभव है। -डॉ. जेएस ठाकुर, पीजीआई कम्युनिटी मेडिसिन एंड स्कूल हेल्थ डिपार्टमेंट के प्रमुख