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हरियाणा: वरिष्ठता के आधार पर नए डीजीपी के लिए तीन नामों का पैनल तय, किसी भी वक्त हो सकती घोषणा

Fri, 13 Aug 2021 02:10 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • यूपीएससी की बैठक में पीके अग्रवाल, आरसी मिश्रा व मोहम्मद अकील के नाम फाइनल
  • शत्रुजीत कपूर और देशराज दौड़ से हुए बाहर, एक नाम पर मुहर लगाएगी प्रदेश सरकार
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संघ लोक सेवा आयोग की इमारत - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हरियाणा में नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने नए डीजीपी की नियुक्ति के लिए तीन नामों का पैनल फाइनल कर गुरुवार शाम प्रदेश सरकार को भेज दिया। पैनल तैयार करते समय वरिष्ठता को पैमाना बनाया गया। पैनल में आईपीएस पीके अग्रवाल, आरसी मिश्रा और मोहम्मद अकील के नाम शामिल हैं। गृह मंत्री अनिल विज ने तीन नामों का पैनल तैयार होने की पुष्टि की है।

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प्रदेश सरकार ने यूपीएससी को पांच नाम का पैनल बनाकर भेजा था। इसमें आईपीएस शत्रुजीत कपूर और देशराज का नाम भी शामिल था। लेकिन यूपीएससी ने दोनों को अंतिम तीन में शामिल नहीं किया। प्रदेश सरकार किसी भी समय नए डीजीपी की नियुक्ति का पत्र जारी कर सकती है। 

यूपीएससी में गुरुवार शाम हुई बैठक में हरियाणा की तरफ से मुख्य सचिव विजय वर्धन ने हिस्सा लिया। यूपीएससी की समिति ने नए डीजीपी की नियुक्ति के लिए पैनल बनाते समय विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और वरिष्ठता को आधार बनाकर तीन नाम तय कर दिए। 

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पैनल में शामिल तीनों आईपीएस का प्रोफाइल

पीके अग्रवाल: 1988 बैच के आईपीएस, डीजी स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के पद पर कार्यरत। मूलरूप से बिहार के, 30-6-2023 को सेवानिवृत्त होंगे। 2004 में पुलिस मेडल और 2015 में राष्ट्रपति पुलिस मेडल से सम्मानित।

मोहम्मद अकील: 1989 बैच के आईपीएस, मूलरूप से अलीगढ़ के। 31-12-2025 को सेवानिवृत्ति। डीजी क्राइम के अलावा निदेशक स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का जिम्मा। 1993 में पुलिस वीरता पुरस्कार, 2006 में पुलिस मेडल व 2014 में राष्ट्रपति पुलिस मेडल प्राप्त।

आरसी मिश्रा: 1989 बैच के आईपीएस, मूलरूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के रहने वाले। 30-6-2024 को सेवानिवृत्ति। डीजी पुलिस आवास निगम के अलावा निदेशक एफएसएल मधुबन का जिम्मा। 2007 में पुलिस मेडल और 2015 में राष्ट्रपति पुलिस मेडल से सम्मानित।

विवादों से रहा मनोज यादव का नाता
वर्तमान डीजीपी मनोज यादव का नाता शुरू से विवादों में रहा। गृह मंत्री अनिल विज के आदेशों पर अमल न करने के कारण वह सबसे पहले सुर्खियों में आए। सीआईडी अफसरों की रिपोर्टिंग गृह मंत्री को न करने के विवाद के साथ उनका नाम जुड़ा। किसान आंदोलन के दौरान स्थिति संभालने में नाकाम रहने के भी उन पर आरोप लगे। 

आईजी वाईपूर्ण कुमार के साथ उनका विवाद हाईकोर्ट तक पहुंचा। बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री की सुरक्षा चूक मामले में आरोपी अफसरों पर कार्रवाई न करने को लेकर वह स्पीकर के निशाने पर हैं और मामला विशेषाधिकार हनन समिति के पास पहुंच गया है। विज उन्हें रिलीव करने के लिए गृह सचिव को पत्र तक लिख चुके हैं। मनोज यादव ने 22 जून को सरकार को पत्र लिखकर उन्हें रिलीव करने को कहा था। उन्होंने वापस आईबी में जाने की इच्छा जताई है।
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