विक्रम ने बताया कि उसने करनाल के ही प्राइवेट स्कूलों से 12वीं तक पढ़ाई की। इसके बाद एनआईटी भोपाल से उसने बीटेक किया। फिर आईएम रोहतक से एमबीए करने के बाद चार प्राइवेट कंपनियों में नौकरी की। लास्ट जॉब लावा इंटरनेशनल मुंबई में की थी। इसी दौरान उसने यूपीएससी की परीक्षा पास की। लगातार मेहनत के बल पर पहली बार इंटरव्यू राउंड में पहुंचे और सफलता मिली।
कुछ बनने की वजह ही हमें मोटिवेशन देती है
युवाओं को अपने संदेश में विक्रम ने कहा कि वे अपना लक्ष्य तय करें। गाइडेंस पर चलें, मिस गाइड न हों। लाइफ में अप डाउन तो होता ही रहता है। जब डाउन होता है तो ज्यादा मोटिवेशन की जरूरत होती है। सबसे बड़ा फैक्टर तो यह है कि आप कुछ क्यों करना चाहते हैं? अगर आपके पास उसकी वजह है तो वह आपको मोटिवेट करके रखेगी। पर अगर सिर्फ पावर के लिए करना चाहते हो तो वह छोटा मोटिवेशन होगा। दीर्घकालीन मोटिवेशन होना बहुत जरूरी है।
ढोल बजाकर मनाया जश्न, दिनभर रहा बधाई का दौर
बेटे की उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है। करनाल पहुंचने पर परिवार वालों ने ढोल बजाकर स्वागत किया। आरती उतारने के बाद उसका मुंह मीठा कराया। अपनी सफलता का श्रेय विक्रम ने परिवार को दिया। विक्रम के भाई विश्वजीत दहिया एडवोकेट हैं। उन्होंने बताया कि दिनरात विक्रम पढ़ाई करता था। कभी किसी भी स्थिति को उसने खुद पर हावी नहीं होने दिया।