हरियाणा में एक पखवाड़े पहले जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से सबक लेने के बाद सरकार ने इस बार आंदोलनकारियों के अल्टीमेटम को देखते हुए केंद्र से सुरक्षा बलों की सौ कंपनियां मांग ली हैं। सुरक्षा बलों की टुकड़ियां किसी भी समय हरियाणा पहुंच जाएंगी। इसके अलावा सरकार ने अंदरूनी तौर पर पुलिस को भी हाईअलर्ट के आदेश दिए हैं।
डीजीपी ने पहले ही रोहतक का दौराकर स्थिति रिपोर्ट से गृह सचिव और मुख्यमंत्री को अवगत करा है। हालांकि सरकार का कोई अधिकारी इस मामले पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन अंदरूनी तौर पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। सूत्रों से सरकार के पास जो इनपुट आया है उसमें यह जानकारी मिली है कि पहले की अपेक्षा लोग इस बार कम इकट्ठे हो रहे हैं। इस मामले में आंदोलनकारियों का रुख भांप रही सरकार वीरवार को जाट आरक्षण पर विधेयक लाने की तैयारी में है।
वीरवार को विधेयक लाने पर संशय: सदन में बुधवार को भी इस बात की पूरी चर्चा थी कि विधेयक आज आएगा, लेकिन किन्हीं कारण वश अब यह विधेयक सरकार वीरवार को लाने की तैयारी कर रही है। हालांकि सूत्रों का यह भी कहना है कि एसवाईएल मामले में उलझी सरकार विधेयक लाने में देरी भी कर सकती है। ऐसे में यदि देरी हुई तो सरकार के सामने संकट की स्थिति आ सकती है। मालूम हो कि करीब एक पखवाड़े पहले हरियाणा में आंदोलनकारियों ने काफी नुकसान किसा था।
इसमें सरकार को फजीहत झेलनी पड़ी थी। बुधवार शाम को सीएम मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में मंत्रियों की बैठक भी हुई। बैठक में विधेयक का मसौदा मंत्रियों के सामने रखा गया। सरकार जाट, जट सिख, त्यागी, रोड़ व बिश्नोई जाति के लोगों को बीसी-सी की नई कैटेगरी बनाकर 10 प्रतिशत आरक्षण देने की तैयारी में है।
सूत्रों के अनुसार मंत्रियों की बैठक के दौरान कई मंत्रियों ने विधेयक के प्रारूप पर आपत्ति जताई। सरकार ने अब निर्णय लिया है कि विधेयक का प्रारूप नए सिरे से तैयार होगा, जिससे सभी सहमत हों। ऐसे में अब वीरवार को भी जाट आरक्षण विधेयक पेश नहीं हो सकेगा।
उपायुक्तों को दिए नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के अधिकार : हरियाणा सरकार ने उपद्रव करने वालों पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (रासुका) लगाने की तैयारी कर ली है। गृह सचिव की तरफ से सभी उपायुक्तों को यह एक्ट लागू करने की पावर दे दी है। एक्ट के तहत छह माह की गैर जमानती सजा का प्रावधान है।