चंडीगढ़। पति एयरफोर्स में थे। वर्ष 1997 में उनका निधन हो गया, तब मैं बीकॉम कर रही थी। गोद में तीन साल की बेटी थी। दुखों का पहाड़ ऐसा टूटा कि हौसला जवाब देने लगा। फिर सोचा कि मेरी जैसी न जाने कितनी महिलाओं के सामने ऐसे दुख आते होंगे। बस यही सोचकर पढ़ाई पूरी की। मां के साथ पिता की जिम्मेदारी निभाई और आज बुलेट पर सवार होकर देशभर की महिलाओं को संदेश दे रही हूं कि वे अबला नहीं हैं। जरूरत है तो बस उन्हें अपनी शक्ति पहचानने की। यह कहना है कि 44 वर्षीय आकाशवाणी की आरजे अंबिका कृष्णन का।
केरल से दो हजार किलोमीटर का सफर और 17 राज्यों से गुजरकर शनिवार को चंडीगढ़ पहुंचीं अंबिका कृष्णन ने पत्रकारों से अपनी साहस भरी यात्रा को साझा किया। सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब में केरल समाजम संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्हें घूमने का शौक था। आकाशवाणी पर मैंने एक कार्यक्रम सुना संदेश टु सोल्जर। फिर तय किया कि देशभर की महिलाओं को सशक्तिकरण का पाठ पढ़ाऊंगी। पहले केरल से चिदंबरम तक की यात्रा बुलेट से की। उसके बाद अपने राज्य से निकलने की योजना बनाई। अब तक उनकी यात्रा में लगभग 70 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं, इसका कोई स्पांसर नहीं है।
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चोट के बावजूद नहीं मानी हार, वासु मेरी साथी
अंबिका ने बताया कि उन्होंने अपनी बुलेट का नाम वासु रखा है। बताया कि मेरी हर मुश्किल में वासु मेरी साथी रही है। अपने राज्य से निकलकर मैंने अपने 25 आकाशवाणी के स्टेशन चुने ताकि कहीं कोई समस्या हो तो मदद मिल सके। 11 अप्रैल को कोच्ची से निकली और चेन्नई में मेरा एक्सीडेंट हो गया। वहां लोगों की मदद से इलाज मिला। डॉक्टर ने कुछ दिन आराम करने को कहा, चोट थी लेकिन हौसला उससे भी ऊपर था। चार दिन आराम करने के बाद वहां से यात्रा शुरू कर दी। अभी दिनभर चलने के बाद पैर में सूजन आ जाती है लेकिन दवा खाकर हर हाल में 25 जुलाई तक यात्रा पूरी करनी है।
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जालंधर से वापस लौटकर चार राज्यों को छूकर लौटना है
अंबिका ने बताया कि वह कोच्चि से निकलकर तमिलनाडु, बेंगलुरु, हैदराबाद, भुवनेश्वर, कटक, बरहामपुर, भागलपुर, पटना, लखनऊ, कानपुर, दिल्ली से होते हुए चंडीगढ़ पहुंची हैं। अब जालंधर जाएंगी, वहां से बाघा बॉर्डर से होकर वापस चंडीगढ़, दिल्ली होते हुए राजस्थान, गुजरात, मुंबई और गोवा होते हुए केरल लौटेंगी। आगे भी वह महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित करेंगी।