चंडीगढ़। कई वर्षों के इंतजार के बाद बुधवार को पहली इलेक्ट्रिक बस शहर की सड़क पर उतर गई। चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने राजभवन से इलेक्ट्रिक बस को हरी झंडी दिखाई और इसमें सवार होकर अधिकारियों के साथ यात्रा भी की। बदनौर को सेक्टर-17 के पुलिस स्टेशन में सोलर प्लांट का उद्घाटन करना था। वह बस में ही बैठकर उद्घाटन स्थल पहुंचे और इसके बाद बस से ही सेक्टर-42 स्थित बेअंत सिंह मेमोरियल गए।
प्रशासक ने इलेक्ट्रिक बस को देखकर संतुष्टि जताई। कहा कि शहरवासियों को इससे काफी लाभ होगा। सबसे बड़ी बात है कि बस से प्रदूषण नहीं फैलेगा, जो इस शहर के लिए काफी फायदेमंद है। परिवहन निदेशक उमा शंकर गुप्ता ने बताया कि 2027-28 तक शहर की सभी 358 डीजल बसों को हटाकर इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। विभाग ने अभी 40 इलेक्ट्रिक बसों के लिए करार किया है और अन्य 40 बसों के लिए करार प्रक्रिया शुरू कर दी है। अगले साल तक चंडीगढ़ में 80 ई-बसें आ जाएंगी।
चंडीगढ़ पहुंची पहली इलेक्ट्रिक बस को 20 दिन तक पीजीआई से मनीमाजरा तक चलाया जाएगा। इस दौरान यह देखा जाएगा कि एक बार चार्ज होने पर बस कितनी देर चलती है। कितनी सवारियों को ढोने की झमता है और कितनी देर में चार्ज होगी। ये सब जांचने के लिए बस में डमी लोगों को बैठाया जाएगा। बुधवार से यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आम लोग इस बस में एक सितंबर के बाद ही सफर कर सकेंगे। इन बसों में सफर करने के लिए लोगों को एसी बस के जितना किराया चुकाना पड़ेगा। गौरतलब है कि शहर में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की कवायद साल 2016 से ही चल रही है। 2017 में सीटीयू ने दो अलग-अलग कंपनियों की इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल भी लिया था। ट्रायल के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि अगले कुछ महीनों में बसें सड़क पर आ सकती हैं, लेकिन अब जाकर ई-बस को हरी झंडी दिखाई गई है।
बस में 35 लोगों के बैठने की जगह, एक दिन में 200 से 300 किमी तक चलेगी
40 इलेक्ट्रिक बसों के लिए सीटीयू का अशोक लेलैंड कंपनी के बीच 10 साल के लिए करार हुआ है। कंपनी के अनुसार बस में 35 लोगों के बैठने की जगह है और अधिकतम एक समय में 55 लोग इसमें सफर कर सकेंगे। बस दो से तीन घंटे में फुल चार्ज हो जाएगी और एक बार चार्ज होने के बाद करीब 140 किलोमीटर चलेगी। उद्घाटन के मौके पर कंपनी के अधिकारी भी उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि बस में मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट भी दिए गए हैं। एक दिन में बस 200 से 300 किमी तक चलेगी। बस में फास्ट चार्जिंग बैटरी लगाई गई, जो सबसे आधुनिक है और जल्द चार्ज हो जाती है। इसके लिए सेक्टर-25 के डिपो नंबर-3 में चार्जिंग स्टेशन बनाया गया है। बस में आग का पता लगाने और अलार्म सिस्टम (एफडीएसएस) भी लगाया गया है।
तमिलनाडु के फिलिप पहले ड्राइवर, इन्हें कंपनी ही देगी तनख्वाह
पहली इलेक्ट्रिक बस के ड्राइवर तमिलनाडु के फिलिप हैं। उन्हें कंपनी द्वारा चुना गया है और तनख्वाह भी कंपनी ही देगी क्योंकि करार के अनुसार बस ड्राइवर, चार्जिंग स्टेशन और रखरखाव का जिम्मा कंपनी का ही होगा। हालांकि, बस में कंडक्टर सीटीयू का होगा। विभाग कंपनी को प्रति किमी 60 रुपये का भुगतान करेगा। उमा शंकर गुप्ता के अनुसार, कुल 40 बसों में से 19 बसें सितंबर के आखिर और बाकी अक्तूबर में पहुंच जाएंगी। कोरोना की वजह से लगे घाटे के कारण परिवहन विभाग ने खुद इलेक्ट्रिक बसें खरीदने से इनकार कर दिया था तो केंद्र सरकार ने फेमा-2 योजना के तहत बीते साल 25 सितंबर को चंडीगढ़ को 80 इलेक्ट्रिक बसों की सौगात दी थी। पहले फेज में चंडीगढ़ को 18 करोड़ रुपये मिले, जिससे 40 बसों को मंगाया गया है।
एक नजर में इलेक्ट्रिक बस
बस की लंबाई: 9400 एमएम
चौड़ाई: 2600 एमएम
व्हीलबेस : 4860 एमएम
फ्लोर उंचाई : 900 एमएम
अधिकतम गति : 70-90 किमी प्रति घंटा
ऑपरेटिंग वोल्टेज : 650 वॉल्ट
बस में सीटें : 35
कुल क्षमता : 55 लोगों की
बैटरी : आधुनिक फास्ट चार्जिंग बैटरी
सुरक्षा उपकरण : पांच सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। आग का पता लगाने के साथ अलार्म सिस्टम लगा है। बस ध्वनि और प्रदूषण मुक्त है और पूर्णतया एसी है।