नालागढ़ ट्रक यूनियन ने भी मालभाड़े में 35 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से बढ़ोतरी कर दी है।
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पंजाब सरकार की आटा-दाल स्कीम को झटका लगने के आसार बन गए हैं। ट्रक ऑपरेटरों ने इसके तहत अनाज डिपुओं तक पहुंचाने का काम एक जुलाई से बंद करने का एलान किया है। जिसका सीधा असर लाखों गरीब परिवारों पर पड़ेगा। पंजाब ट्रक ऑपरेटर्स यूनियन की बैठक बुधवार को जगरांव में प्रधान हैप्पी संधू की अगुवाई में हुई, जिसमें एक जुलाई से डिपुओं तक अनाज पहुंचाने का काम बंद करने का फैसला किया गया। हैप्पी संधू ने बताया कि कोर कमेटी की मीटिंग पांच जुलाई को बुलाई गई है। इसमें अगली रणनीति पर फैसला किया जाएगा।
गेहूं की ढुआई के करीब साढे़ चार सौ करोड़ रुपये की अदायगी सरकार ने अब तक नहीं की है। इससे ट्रक ऑपरेटरों में रोष है। इसकेअलावा लेबर का भी करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये बकाया है। इसके विरोध में ट्रक ऑपरेटरों ने 28 जून से स्पेशल गाड़ियों को अनाज पहुंचाने का काम बंद कर दिया है। पंजाब से रोजाना अनाज से भरी कई स्पेशल गाड़ियां दूसरे राज्यों को जाती हैं। यह काम बिल्कुल ठप हो गया है। अब डिपुओं को अनाज न पहुंचने से गरीब परिवारों पर असर पड़ेगा। गांवों के डिपुओं को तो सप्लाई बिल्कुल बंद हो जाएगी।
ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि फूड-सप्लाई अधिकारी बार-बार यही दोहरा रहे हैं कि एफसीआई से बात कर रहे हैं, लेकिन कई महीने बाद भी मसला हल नहीं हुआ है। अदायगी न होने से छोटे ऑपरेटरों का गुजारा मुश्किल हो गया है। राज्य में करीब 93 हजार ट्रक हैं। इनमें से पचास हजार अनाज ढुआई का काम करते हैं। ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि अब वे कोई सरकारी काम नहीं करेंगे।
मोदी और जेटली से मिल चुके हैं सीएम
केंद्र सरकार की ओर से गेहूं की पूरी कैश क्रेडिट लिमिट जारी न करने से ही ट्रक ऑपरेटरों और लेबर की अदायगी रुकी हुई है। पिछले हफ्ते इस मुद्दे को लेकर सीएम प्रकाश सिंह बादल खुद दिल्ली गए थे। उनके साथ फूड सप्लाई मंत्री आदेश प्रताप कैरों और वित्तमंत्री परमिंदर ढींढसा भी थे। तीनों ने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिर वित्तमंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी। मोदी ने समस्या के हल को केंद्रीय अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने का भी एलान किया था, लेकिन अब तक मसला हल नहीं हुआ है।