पहाड़ी और सेंधा नमक खाने का ट्रेंड थायरायड का शिकार बना रहा है। पीजीआई की इंडोक्राइनोलॉजी की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिन्होंने सेहत बनाने के लिए आयोडीन युक्त नमक के बजाय दूसरे नमक का सेवन शुरू किया और फार्मूला उल्टा पड़ गया। ओपीडी में ऐसे कई मामले आ चुके हैं जिसमें एक ही परिवार के लगभग सभी सदस्य आयोडीन नमक न खाने से थायरायड का शिकार होकर अस्पताल पहुंचे हैं। विभाग के प्रमुख प्रो. संजय भडाडा का कहना है कि सेंधा या अन्य पहाड़ी नमक खाने का चलन पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। परिणाम धीरे-धीरे गंभीर रूप में सामने आने लगा है इसलिए सचेत होने की जरूरत है। ओपीडी में मरीजों को इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है।
इन लक्षणों पर रखें नजर
घबराहट, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, हाथों का कांपना, अधिक पसीना आना, दिल की धड़कन बढ़ना, बालों का पतला होना एवं झड़ना, मांसपेशियों में कमजोरी एवं दर्द रहना, अत्यधिक भूख लगना, वजन का घटना, महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता, ओस्टियोपोरोसिस से हड्डी में कैल्शियम तेजी से खत्म होना।
ये बन सकते हैं मर्ज का कारण
अव्यवस्थित लाइफस्टाइल, खाने में आयोडीन कम या अधिकता, ज्यादा चिंता करना, वंशानुगत, गलत खानपान और देर रात तक जागना, डिप्रेशन की दवाइयां लेना, डायबिटीज, भोजन में सोया उत्पादों का अधिक इस्तेमाल।
बचाव के लिए ये है जरूरी
भोजन में आयोडीन की संतुलित मात्रा का सेवन, रोजाना योग करना, वर्कआउट या शारीरिक श्रम, धूप में बैठना, पर्याप्त मात्रा में नींद लेना, ज्यादा फलों एवं सब्जियों को भोजन में शामिल करें, हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन, पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करें।