केंद्र सरकार के कपड़े पर 12 प्रतिशत जीएसटी बढ़ाने के फैसले का देशभर के व्यापारियों ने विरोध शुरू कर दिया है। शहर के कपड़ा व्यापारियों का कहना है जीएसटी बढ़ने का मतलब है जनता की जेब पर दोगुना बोझ बढ़ाना, क्योंकि व्यापारी अपनी लागत ग्राहकों से ही निकालेगा। कोरोना महामारी के बाद जैसे तैसे मार्केट थोड़ा संभला है, इस फैसले से फिर हालत खराब होगी।
पांच प्रतिशत से ज्यादा जीएसटी बढ़ाना ठीक नहीं
जीएसटी शुरू हुआ था तो कपड़े पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगा था। यह व्यक्ति की मूलभूत सुविधा है। इसलिए इतना खर्चा तो वहन हो सकता है। जीएसटी बढ़ाना ठीक नहीं है। -चरनजीव सिंह, प्रधान, होलसेल क्लॉथ मर्चेंट एसोसिएशनविज्ञापन
व्यापारी नहीं, सीधे जनता पर बोझ बढ़ेगा
पांच से बढ़ाकर 12 प्रतिशत जीएसटी करना न सिर्फ व्यापारी के लिए बोझ है, इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ेगा, क्योंकि व्यापारी अपना खर्चा तो लोगों से ही निकालेगा। -नरेश जैन, कपड़ा व्यापारी, सेक्टर-37
कोरोना में वैसे ही खाली हो गईं दुकानें
कोरोना महामारी के बाद कपड़े में वैसे ही महंगाई आ गई है। ग्राहक है नहीं और दुकानों का किराया निकल नहीं रहा। ऐसे में जीएसटी बढ़ाकर दोहरी मार देने की तैयारी है। -नरेंद्र सिंह रिंकू, कपड़ा व्यापारी, सेक्टर-19
ग्राहकों को रोकने के लिए कर हमें भुगतना होगा
कोरोना महामारी के कारण वैसे ही नुकसान हुआ है। अभी कुछ बंधे ग्राहक हैं जो दुकानों पर आ रहे हैं। जीएसटी के साथ दाम बढ़ने के डर से ग्राहकों को रोकने के लिए हमें ही भुगतना होगा। -नवदीप शर्मा, कपड़ा व्यापारी, सेक्टर-17