अगर लंबी इस बार पंजाब की सबसे हॉट सीट है, तो जलालाबाद भी उससे कम नहीं है। पिछले दो विधानसभा चुनावों से यहां से शानदार जीत दर्ज करते आ रहे डिप्टी सीएम सुखबीर बादल की राह इस बार आसान नहीं है।
पहले आप के सांसद भगवंत मान ने उन्हें कड़ी चुनौती दी थी, अब कांग्रेस सांसद रवनीत बिट्टू ने मुकाबले को तिकोना बना दिया है। जलालाबाद में इस बार दिलचस्प बात यह है कि तीनों प्रमुख उम्मीदवार बाहरी हैं।
सुखबीर बेशक यहां से दो बार जीत चुके हैं, लेकिन वह जलालाबाद के नहीं हैं। मान और बिट्टू भी हलके के नहीं हैं। एक और दिलचस्प पहलू यह है कि इस हलके के दो नेता भी चुनाव मैदान में हैं, पर वे दूसरे विधानसभा क्षेत्रों से हैं।
बसपा के पूर्व सांसद मोहन सिंह फलियांवाला को आप ने फिरोजपुर से टिकट दिया है, तो सांसद शेर सिंह घुबाया के बेटे दविंदर घुबाया कांग्रेस टिकट पर फाजिल्का से लड़ रहे हैं। हलके के लोग सुखबीर को बाहरी नहीं मानते।
मान ने बहुत पहले प्रचार शुरू कर दिया था, वह भी उनकी नजर में बाहरी नहीं हैं। पर बिट्टू की एंट्री काफी लेट होने के कारण उन पर बाहरी का टैग लग गया है।
कमजोर शुरुआत के बाद कांग्रेस ने तिकोनी बनाई लड़ाई
कांग्रेस
जलालाबाद में विकास होने के कारण लोगों को शिकायत नहीं है, लेकिन सुखबीर के हलका इंचार्ज सतिंदर मंटा के कारनामे लंबी की तरह इस हलके में
भी शिअद के लिए मुश्किल बन गए हैं।
हालांकि सुखबीर ने समय रहते डैमेज कंट्रोल किया, परमजीत सिंधवा को चुनाव इंचार्ज बनाया। घुबाया के कांग्रेस में जाने के बाद रायसिख बिरादरी को अपनी ओर करने के लिए सुखबीर ने हाल ही में यहां से कांग्रेस टिकट के दावेदार पूरन मुजीदिया को शिअद में शामिल किया है।
भगवंत मान को प्रचार के लिए काफी समय मिल गया। गांवों में उनका काफी क्रेज है। सबसे अहम बात यह है कि हलके में सबसे ज्यादा प्रभावशाली
रायसिख बिरादरी के बड़ी संख्या में गांव मान के पक्ष में आ गए हैं।
रवनीत बिट्टू को देर से टिकट मिलने का नुकसान जरूर हुआ, लेकिन धीरे-धीरे वह भी मजबूत हो रहे हैं। कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में पचास हजार वोट मिले थे। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को 17 हजार और बागी हंसराज जोसन को 31 हजार वोट मिले थे।
जोसन हलके के दूसरे प्रमुख वोट बैंक कंबोज बिरादरी से हैं। जोसन इस बार बिट्टू के साथ चल रहे हैं। एक दिन पहले शेर सिंह घुबाया भी बिट्टू के साथ रायसिख बिरादरी के गांवों में वोट मांगने निकल पड़े हैं। शहर के हिंदू भी कांग्रेस के साथ नजर आ रहे हैं। जिससे मुकाबला पूरी तरह त्रिकोणीय बन गया है।
रायसिख बिरादरी पर नजर
पंजाब विधानसभा चुनाव
रायसिख बिरादरी पर नजर
जलालाबाद में करीब 1.92 वोटर हैं। जिनमें से सबसे बड़ा वोट बैंक रायसिख बिरादरी है, जिसके हलके में करीब 65 हजार वोट हैं। इनके अलावा
कंबोज बिरादरी के यहां करीब 40 हजार वोट हैं।
कंबोज बिरादरी के ज्यादा वोट इस बार कांग्रेस को मिलने की उम्मीद है, लेकिन सबकी नजरें रायसिखों पर लगी हैं। इन्हीं की वजह से शेर सिंह घुबाया और सुखबीर बादल जीतते रहे हैं, पर इस बार रायसिख बंटे नजर आ रहे हैं।
हालांकि अंतिम फैसला वह मतदान के एक दिन पहले लेंगे। गांव फल्लियांवाला में ज्यादातर आबादी रायसिखों की है। ये लोग अब तक अकाली दल को वोट डालते आए हैं।
घुबाया के कांग्रेस में जाने के बाद के सवाल पर लोग कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि वे सारे वोट कांग्रेस को डाल देंगे। इसी गांव के मोहन सिंह फल्लियांवाला आप टिकट पर फिरोजपुर से लड़ रहे हैं, इसलिए आप को भी वोट पड़ेंगे, लेकिन ज्यादातर वोटर अभी भी शिअद के साथ हैं।
घुबाया खुद गांव में आकर लोगों से मिलें तो शायद समीकरण बदल सकते हैं। पिछले दिनों जारी हुए घुबाया के विवादित वीडियो को लेकर भी सस्पेंस बना हुआ है।