बारिश के चलते अन्य प्रदेशों की तरह ही हरियाणा में कोयले की आपूर्ति बाधित हो गई है। इस समय प्रदेश को 8 रैक कोयले की रोजाना जरूरत है, लेकिन मात्र 4 रैक ही मिल रहे हैं। थर्मल प्लांटों के कोयला स्टॉक की बात करें तो वह 25 दिन से घटकर मात्र 4 दिन का रह गया है। बावजूद इसके प्रदेश में फिलहाल बिजली संकट नहीं है और न ही किसी भी वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए कट लगाए जा रहे हैं।
रोजाना 16 से 18 करोड़ यूनिट बिजली की मांग के अनुसार सप्लाई दी जा रही है। सरकार का दावा है कि आगामी सप्ताह तक कोयले की आपूर्ति सुचारू हो जाएगी और हालात सामान्य होेंगे।
बिजली विभाग के एसीएस पीके दास ने बताया कि कोयला उत्पादक प्रदेशों में बारिश से आई बाढ़ के कारण अगस्त माह से ही कोयले की सप्लाई बाधित है। पर्याप्त कोयला नहीं मिलने के कारण ही प्लांटों के स्टॉक से काम चलाया जा रहा है, लेकिन हालात नियंत्रण में है। प्लांटों में स्टॉक पूरा रखने के लिए अतिरिक्त कोयले की जरूरत है।
पीके दास ने कहा प्रदेश में इस समय एक भी प्लांट की कोई यूनिट कोयले की कमी से बंद नहीं हुई है। हिसार और यमुनानगर की एक–एक यूनिट एक माह पहले से ही तकनीकी कारणों से बंद हैं। इन दोनों यूनिटों की मरम्मत चल रही है। प्रदेश में सभी थर्मल प्लांट लोकल कोयले से चलते हैं, इनमें से किसी भी प्लांट में विदेशी कोयला इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसलिए यहां पर विदेशी कोयले की सप्लाई का कोई मुद्दा नहीं है। दास ने दावा किया कि चार दिन का स्टॉक पिछले एक माह से बरकार है, क्योंकि रोजाना करीब (4 रैक) 15 हजार मीट्रिक टन कोयला आ रहा है, उससे काम चल रहा है।
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चल रही हैं पांच यूनिट
प्रदेश में पांच पावर प्लांट हैं और इनमें 12 यूनिट हैं। इस समय हिसार, यमुनानगर और फरीदाबाद प्लांट की एक-एक और पानीपत थर्मल प्लांट को दो यूनिटें चल रही हैं। शेष यूनिट नो डिमांड के चलते बंद हैं। प्रदेश की कुल बिजली क्षमता 12 हजार मेगावाट है। इनमें से प्रदेश में 2582 मेगावाट का उत्पादन होता है, शेष बिजली बाहर से ली जाती हैं।
बिजली आपूर्ति के आंकड़े