प्रशासन की ओर से दी गई दलील के आधार आखिरकार बीते फरवरी में हाईकोर्ट ने प्रशासन की बात मानते हुए दायर याचिका को रद्द कर दिया। याचिका में बताया गया कि सिटको की माली हालत ठीक नही है। कारपोरेशन लगातार घाटे में जा रहा है। इसलिए कर्मचारियों को दो साल का एक्सटेंशन देने की याचिका रद़्द की जाए।
ऐसे चला हाईकोर्ट में मामला
कारपोरेशन द्वारा 58 साल की आयु में कर्मचारियों के रिटायरमेंट होने के मामले में हाईकोर्ट ने 13 अक्टूबर 2016 को आदेश पर स्टे लगाई थी। साथ ही सिटको को सभी कर्मचारियों को दोबारा ज्वाइन कराने के आदेश जारी किए थे।
इसके बाद भी सिटको ने ज्वाइन नहीं कराया तो कोर्ट ने एक सप्ताह में सभी को ज्वाइन कराने के सख्त आदेश जारी किए थे। डबल बेंच ने सिटको को पहले सिंगल बेंच में अपील करने को कहा था। बाद में सिंगल बेंच ने भी 30 अगस्त 2017 को सिटको की अपील खारिज कर दी थी।
अफसर जमा करते हैं मामूली बिल बाउचर
कर्मचारी नेता कश्मीर चंद ने बताया कि 2013 से अब तक करीब 35 प्रतिशत कर्मचारियों को दो साल एक्सटेंशन का लाभ मिल चुका है। उनका आरोप है कि प्रशासन के अफसरों की गलत नीतियों के चलते सिटको घाटे में गया है।
कर्मचारी नेता का दावा है कि अफसर आए दिन सिटको होटल्स में पार्टियां करते हैं, जिनका बिल बाउचर मामूली रूप में चुकता किया जाता है। यही वजह है कि सिटको घाटे में जा रहा है। आरोप कर्मचारियों पर लगाया जा रहा है जो सरासर गलत है।