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पीयू सीनेट सदस्यों की अधिसूचना जारी न होने का मामला हाईकोर्ट में उठेगा, 8 को सुनवाई

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट सदस्यों की अधिसूचना जारी न होने का मामला हाईकोर्ट में उठेगा। सीनेट से संबंधित चल रहे केस की अगली सुनवाई 8 दिसंबर को है। ऐसे में दोनों ही पक्ष अपनी अपनी तैयारियां कर रहे हैं। बताया जाता है कि सीनेट के आखिरी गठन तक यह केस चलता रहेगा। हालांकि सूत्र कहते हैं कि सदस्यों की अधिसूचना कभी भी जारी हो सकती है।
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पीयू सीनेट चुनाव के आदेश हाईकोर्ट की ओर से दिए गए थे। उसी याचिका पर सुनवाई चलती आ रही है। पीयू अपनी ओर से जवाब दाखिल करती है। अब केस की सुनवाई 8 दिसंबर को है। सूत्रों का कहना है कि केस दायर करने वाला पक्ष इस मुद्दे को भी हाईकोर्ट में प्रमुखता से उठाएगा कि अब तक सीनेट सदस्यों का नोटिफिकेशन नहीं करवाया गया जबकि दो माह चुनाव को बीत चुके। मनोनीत सदस्यों की सूची तभी जारी होती है, जब चुने गए सदस्यों के नाम फाइनल हो जाते हैं। लेकिन इस बार मनोनीत सदस्यों के नाम पहले ही जारी हो गए थे। उनकी अधिसूचना पहले हो गई और चुने गए लोग अभी सीनेटर नहीं कहलाए, क्योंकि अधिसूचना उनकी बकाया है।
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सीनेट के गठन को रोक रहा दूसरा पक्ष
सीनेट चुनाव जीतने वाले गोयल ग्रुप का कहना है कि सीनेट के गठन को दूसरा पक्ष रोक रहा है। वह नहीं चाहते कि सीनेट की बैठकें हों। मनमाने निर्णय लेने की उनकी आदत हो गई है। उनका कहना है कि उनके ग्रुप में सदस्यों की संख्या ठीक स्थिति में है। जैसे ही सभी सदस्यों की अधिसूचना जारी होगी होगी, उसके बाद कुछ लोगों इधर उधर जाएंगे। गोयल ग्रुप का दावा है कि मनोनीत हुए कुछ सीनेटर उनके संपर्क में हैं जो उनके साथ खड़े होंगे। ऐसे में बहुमत उनके पास होगा। उनका भी यही कहना है कि वह सीनेट सदन को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाना चाहते, लेकिन निर्णय पीयू के हित में होंगे तभी वह समर्थन करेंगे। एक तरफा निर्णय होने पर विरोध दर्ज किया जाएगा।
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प्रो. यूनिवर्सिटी ग्रुप बन रहा, कितना होगा सफल अभी पता नहीं
पीयू में हाल ही में एक ग्रुप की ओर से मनोनीत व चुनाव जीते हुए सदस्यों को बुलाया गया था। बैठक में दावा किया गया कि राजनीति से ऊपर उठकर पीयू के हित के लिए प्रो. यूनिवर्सिटी ग्रुप बना है। इस ग्रुप को बनाने में सीनेटर सत्यपाल जैन की अहम भूमिका है। उन्होंने सभी सदस्यों से कहा है कि न कोई दल है और कोई ग्रुप। सभी लोग पीयू के लिए काम करेंगे। अब देखना यह होगा कि पीयू के इस ग्रुप को कितना सफल बनाया जा सकता है। सीनेट सदन पहले की तरह भाजपा बनाम कांग्रेस होता है या फिर पीयू के हितधारक ही बेहतर निर्णय ले पाते हैं। जानकारों का कहना है कि इस बार दोनों ही ग्रुप पीयू की बेहतरी के लिए आगे बढ़ रहे हैं। देरी सिर्फ अधिसूचना के चलते हो रही है।
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