फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

200 कॉलेजों के कला वर्ग के सवा लाख छात्रों की विज्ञान पढ़ने की इच्छा रह गई अधूरी

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी तीन साल बीत जाने के बावजूद अपने 200 कॉलेजों में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू नहीं कर पाई है। कला वर्ग के 1.25 लाख विद्यार्थी इंतजार कर रहे हैं कि वह विज्ञान के विषय पढ़ेंगे, लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पा रही है। हैरत की बात यह है कि पीयू प्रशासन ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है, लेकिन इसे लागू नहीं किया जा रहा। हालांकि एक साल से सीनेट के चुनाव नहीं हुए। सिंडिकेट भी कार्य नहीं कर रही है, अब चुनाव होंगे तो इसकी संभावनाएं बढ़ेंगी।
विज्ञापन

पीयू ने साइंस वर्ग में सबसे पहले सीबीसीएस सिस्टम लागू किया था। इसके लिए पूरा प्रस्ताव तैयार किया गया और वह पास हो गया। आज विज्ञान वर्ग के हजारों छात्र मनचाहे विषयों की पढ़ाई कर पा रहे हैं। आर्ट के विद्यार्थियों के लिए भी प्रस्ताव तैयार करने के बारे में चर्चा की गई और प्रस्ताव तैयार किया जाने लगा। पीयू में तो यह सिस्टम काम कर रहा है, लेकिन इससे संबद्ध 200 कॉलेजों में दो साल बीत जाने के बाद भी 1.20 लाख विद्यार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। हालांकि सिंडिकेट व सीनेट की बैठकों में भी यह प्रस्ताव ले जाया गया था, लेकिन इस पर हुए निर्णय को सार्वजनिक नहीं किया गया।
इनसेट---
सालभर होता है कॉलेजों में दाखिले, इसलिए हुआ विरोध
सीबीसीएस सिस्टम का विरोध कुछ कॉलेज कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस सिस्टम से छात्रों को रेगुलर पढ़ाई करनी होगी। हाजिरी भी पूरी होनी चाहिए। कुछ कॉलेजों में यह खेल चल रहा है कि वह केवल छात्रों के दाखिले करने में विश्वास करते हैं, फिर चाहे विद्यार्थी सालभर आए या नहीं। इससे उन्हें नुकसान होगा। हालांकि अब पीयू ने दबाव बनाया है कि उन्हें भी सीबीसीएस सिस्टम को मंजूरी मिलने केबाद यह प्रस्ताव लागू करना होगा। सूत्रों का कहना है कि यह सिस्टम लागू होते ही कुछ कॉलेजों में छात्रों की संख्या में गिरावट आएगी और उससे उनके खेल का खुलासा भी होगा।
विज्ञापन

इनसेट---
नौकरियां कई क्षेत्रों में मिलेंगी
सीबीसीएस के जरिये यदि विद्यार्थी आर्ट केसाथ-साथ साइंस की भी पढ़ाई करेंगे तो वह नौकरी के लिए साइंस वर्ग में भी अप्लाई कर सकेंगे। यानी कला व विज्ञान के लिए निकलने वाली भर्तियों में आवेदन के हकदार होंगे। हजारों छात्रों के सामने रोजगार के रास्ते खुलेंगे। साइंस वर्ग के पास आउट विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल रहा है। वह आर्ट आदि विषयों की पढ़ाई करने सामाजिक क्षेत्र में हिस्सा ले रहे हैं।
ये है पीयू का तर्क
गवर्निंग बॉडी की ओर से इस प्रस्ताव को अंतिम रूप नहीं दिया गया, इसके कारण यह लागू नहीं हो सका। इस बीच कॉलेजों की काउंसिलिंग की गई कि वह इस सिस्टम हो अपनाने के लिए तैयार रहें। इसके लाभ भी बताए गए। कार्यशाला का भी आयोजन किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें