चंडीगढ़। नवजात शिशुओं में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को एक जटिल चुनौती बताते हुए निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि क्लीनिकल ज्ञान के साथ आधुनिक जांच तकनीकों का संतुलन बेहद जरूरी है। उन्होंने डॉक्टरों को व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। यह बात उन्होंने पीजीआई के एडवांस्ड पीडियाट्रिक सेंटर के ऑडिटोरियम में शनिवार से नियोनेटर न्यूरोलॉकिल डिस्ऑडर विषय पर दो दिवसीय सिंगल थीम वर्कशॉप का शुभारंभ के दौरान कही। निदेशक ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। वर्कशॉप में देशभर के विशेषज्ञों ने इलाज और जांच की नई तकनीकों पर जोर दिया।
वर्कशॉप के चेयरपर्सन प्रो. प्रवीण कुमार ने कहा कि इस तरह की फोकस्ड वर्कशॉप में थ्योरी के साथ हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग से प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव मिलता है। आयोजन सचिव प्रो. सौरभ दत्ता ने बताया कि यह 10वीं सिंगल थीम वर्कशॉप है और हर बार अगला विषय प्रतिभागियों की पसंद के आधार पर तय किया जाता है। डॉ. सुप्रीत खुराना ने नवजात शिशुओं के न्यूरोलॉजिकल परीक्षण पर प्रेजेंटेशन देकर सही तकनीकों की जानकारी दी। डॉ. नवीन जैन ने नवजात में ब्रेन डिसफंक्शन के मामलों को संभालने के तरीके समझाए। प्रो. सौरभ दत्ता ने मेनिन्जाइटिस के निदान और उपचार में होने वाली सामान्य गलतियों पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. दीपक चावला ने जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी से होने वाले दिमागी नुकसान और उसके उपचार, जैसे बॉडी कूलिंग तकनीक, पर विस्तार से जानकारी दी।
दिल्ली से आए डॉ. नवीन प्रकाश गुप्ता ने प्री-टर्म शिशुओं में ब्रेन ब्लीडिंग और व्हाइट मैटर डैमेज पर व्याख्यान दिया। डॉ. चिराग आहूजा ने एमआरआई और सीटी स्कैन पढ़ने की तकनीक सिखाई। वर्कशॉप में तीन हैंड्स-ऑन सेशन और रियल-लाइफ केस स्टडीज पर चर्चा भी कराई गई।