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शहीद उधम सिंह नाटक में दिखाई निहत्थों पर अंग्रेजों की क्रूरता

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चंडीगढ़। सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन में वीरवार को पांचवां दो दिवसीय बैसाखी थिएटर फेस्टिवल का शुभारंभ हुआ। यह आयोजन संगीत नाटक अकादमी दिल्ली एवं पंजाब कला परिषद के सहयोग से थिएटर फॉर थिएटर की ओर किया गया। पहले दिन पुस्तक विमोचन और नाटक शहीद उधम सिंह का मंचन हुआ।
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इस नाटक के जरिए खासतौर से उन मासूमों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई जो 13 अप्रैल 1919 को अंग्रेज सरकार की नीतियों का विरोध करने घर से निकले पर कभी नहीं लौट पाए। नाटक के निर्देशक सुदेश शर्मा ने बताया कि 13 अप्रैल 1919 का वह दिन किसी भारतीय के लिए न भूलने वाला दिन है। इस दिन अंग्रेजी सेना की एक टुकड़ी ने निहत्थे भारतीय प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाकर बड़ी संख्या में नरसंहार किया था। हजारों की संख्या में आम लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन में रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए इकट्ठे हुए थे पर जनरल ओ डायर की सनक का शिकार हो गए। यहीं से आजादी के जज्बे को एक नई दिशा मिली थी। यहीं से उधम सिंह ने राम मोहम्मद सिंह आजाद बनने का भी निर्णय लिया था। यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था तो वह घटना यह जघन्य हत्याकांड ही था।
इस नाटक को सीएस शिंद्रा ने लिखा है। सुदेश शर्मा ने बताया कि नाटक में थिएटर फॉर थिएटर के कलाकारों ने शहीद उधम सिंह की जलियांवाला से लेकर लंदन के कॉक्सटन हॉल तक की यात्रा को बड़े ही सलीके के साथ पेश किया। नाटक में मनिंदर भट्टी, शरणजीत सिंह, अमृत, शुभम, ईशु बब्बर, आकाशदीप, गोपेश, यशपाल, भूपिंदर कौर, सूरज, हरजाप, दविंदर एवं चरण सिंह ने मुख्य भूमिकाएं निभाई। संगीत निर्देशन हरविंदर सिंह का रहा।
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नाटक से पहले निम्मी वशिष्ठ की लिखी पुस्तक ‘बंद दरवाजा’ का विमोचन
नाटक से पहले वरिष्ठ लेखिका निम्मी वशिष्ठ की कविताओं से सजी नई किताब ‘बंद दरवाजे’ का विमोचन हुआ। इस अवसर पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव शर्मा, सेक्टर-16 के के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके नागपाल और दीक्षांत एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष मितुल दीक्षित भी उपस्थित रहे। निम्मी ने बताया कि यह उनकी पांचवीं पुस्तक है। पंजाबी में शुक्रिया तेरा, रूहां नाल यारियां, सोचदी हां और हिनंदी में यथार्थ इससे पहले प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त चार सांझा संकलन कविताएं व एक लघुकथा का संकलन भी आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह महसूस करती हैं कि घर के भीतर अक्सर तनाव, चिड़चिड़ापन होते हुए भी बाहर निकलते ही चेहरों पर मुस्कान का मुखौटा लगा कर घूमते हैं। बंद दरवाजे कविता में भी यही कहने का प्रयास किया है कि अगर हमेशा शांत रहें और प्यार से रहें तो हर तरफ खुशियां होंगी और रिश्ते खूबसूरत होंगे।
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