फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिक्षक दिवस: जब गुरु जी की एक सीख ने बदल दी जिंदगी... और सफलता ने चूम लिए कदम

Sun, 05 Sep 2021 08:12 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मां के बाद शिक्षक ही बच्चे की जिंदगी संवारते हैं। वे बच्चे में आत्मविश्वास भरते हैं और उसे सफलता की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। कई बार शिक्षकों की बातें जिंदगी का रुख भी बदल देती हैं।
विज्ञापन
शिक्षक दिवस। - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सफल लोगों के पीछे किसी न किसी गुरु या मार्गदर्शक का हाथ जरूर होता है। जो न सिर्फ उन्हें राह दिखाता है बल्कि सही व गलत में फर्क भी बताता है। जो गुरुमंत्र को समझ लेता है, वही आगे चलकर अपना और अपने शिक्षक का नाम रोशन करता है। शिक्षक दिवस के मौके पर अमर उजाला ने अपने पाठकों से उनके प्रिय शिक्षक और उनकी उस शिक्षा के बारे में जाना, जिससे उनकी जिंदगी बदल गई थी।  

विज्ञापन


मैडम जी के कहे शब्दों पर किया अमल, हो गया चयन
यह बात मार्च 2003 की है। जब मैं डीएवी कॉलेज अबोहर पंजाब में बीएड की पढ़ाई कर रहा था। उस समय मुझे डीआरडीओ से वरिष्ठ तकनीकी सहायक के पद हेतु परीक्षा का पत्र मिला। इसमें शामिल होने के लिए जब मैंने कॉलेज में अवकाश का प्रार्थना पत्र दिया था तो उपप्राचार्य मैडम उषा सिडाना ने मुझसे पूछा कि कितनी वैकेंसी है। प्रत्युत्तर में मैंने नकारात्मक भाव से कहा- मैडम, एक ही वैकेंसी है। पता नहीं चयन होगा कि नहीं। इस पर मैडम ने जो शब्द कहे, उसने मेरे नजरिया को ही बदल दिया। मैडम ने कहा तो क्या हुआ, एक ही सीट है। तुम्हें भी तो बैठने के लिए एक ही सीट चाहिए, कौन सा तुम्हें दस सीटें चाहिए। इससे इतना आत्मविश्वास बढ़ गया उस वैकेंसी के लिए सिर्फ मेरा ही चयन हुआ। मैडम के उन शब्दों ने मेरी जिंदगी बदल दी। -विजय विज, तकनीकी अधिकारी, डीआरडीओ चंडीगढ़


गुरुजी की प्रेरणा से बन पाई शिक्षक
मैं अपने प्रिय अध्यापक शत्रुघ्न चौहान को श्रद्धापूर्वक नमन करती हूं। वे नौंवी व दसवीं में हिंदी व सामाजिक विज्ञान पढ़ाते थे। उनका पढ़ाने का तरीका इतना अच्छा था कि कोई भी बच्चा दसवीं की परीक्षा में उनके विषय में फेल नहीं हो सकता था। वे पढ़ाई के साथ साथ शिक्षाप्रद कहानियां भी सुनाते थे। एक बार आर्थिक तंगी की वजह से मैं अपने स्कूल की फीस नहीं भर पाई तो उन्होंने अपनी तनख्वाह से बिना बताए मेरी फीस भर दी। उनकी उदारता ने प्रेरित किया और मैंने शिक्षक बनने की ठान ली। शत्रुघ्न सर की प्रेरणा से मैं आज चंडीगढ़ में अध्यापक हूं। -संध्या वर्मा, अध्यापक चंडीगढ़

विज्ञापन

गुरु ने बढ़ाया मनोबल तो हो गया सफल

मेरे भविष्य को उज्ज्वल बनाने में मेरे गुरु धनपत सिंह आईएएस (रिटायर्ड) की अहम भूमिका रही है। 12वीं पास करने के बाद मेरे पिता का देहांत हो गया था। परिवार की सभी जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई। आगे क्या होगा, कुछ समझ में नहीं आ रहा था। उस वक्त धनपत सिंह ने मुझे आर्थिक तथा मानसिक सहारा दिया। उन्होंने मुझे मजदूरी के साथ पढ़ाई भी जारी रखने के लिए प्रेरित किया। मैंने सरकारी नौकरी के लिए 15 बार पेपर व साक्षात्कार दिए, पर सफलता नहीं मिली। आखिर में 2002 में हरियाणा राज्य परिवहन विभाग में परिचालक की नौकरी मिली। उसके बाद 2013 में हरियाणा सरकार में चालक के पद पर नियुक्ति मिली। उन्हीं की प्रेरणा से आज मैं स्नातकोत्तर शिक्षा ग्रहण कर रहा हूं। साथ ही हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड में चालक के पद पर कार्यरत हूं। गुरु जी के बिना मेरी जिंदगी में इतना बड़ा बदलाव आना संभव नहीं था।  -ब्रह्मानंद मेहरा, सेक्टर- 14 पंचकूला

लक्ष्मी बाबू ने मुझे हर कला में निपुण बनाया
मेरी विद्यार्थी आकृति को सुकृति देने में शिक्षक लक्ष्मी बाबू का अविस्मरणीय सहयोग रहा। उन्होंने मुझमें सुसंस्कार भरा। वे हर रविवार को मुझे आर्यसमाज ले जाते थे। हवन प्रार्थना के बाद सत्संग में बोलने के लिए प्रोत्साहित करते थे। भाषण देने की कला में प्रवीण किया। पहले संवाद को रट लो फिर आइने के सामने जोर-जोर से बोलो। ऐसा करने से मुझमें वाकपटूता का सृजन हुआ। मैं सामान्य विद्यार्थी रहते हुए स्कूल तथा इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षकों का चहेता बना। उसी इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर के बजाय सहायक प्राध्यापक में नियुक्ति मिली। अच्छा वक्ता होने के कारण आगे सेवाकाल में राष्ट्रभाषा और फेयरवेल समिति का अध्यक्ष बन अपने संस्थान निदेशक का भी चहेता बना। आम से खास बन गया। मैं आज भी लक्ष्मी बाबू को पूजता हूं। -बासुदेव प्रसाद, पचंकूला

जब इतिहास में दिलवाए अच्छे नंबर
मनोज कुमार बंसल को अध्यापक कहूं, मोटिवेटर कहूं या केयर टेकर। वे एक ऐसे शख्स हैं, जिनके लिए शायद किताबी शब्दकोश कम पड़ जाए। दसवीं क्लास में इतिहास विषय को लेकर मानसिक परेशान था। कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। ऐसा लग रहा था कि सब रटा जाएगा। लेकिन सर ने ऐसा पढ़ाया कि 17 दिन में पूरा विषय मेरी समझ में आ गया। और मैंने 100 में से 95 अंक हासिल किए। एक बात बता दूं मेरे टीचर मेरे पापा हैं, जो एक केमिस्ट्री के टीचर होने के बावजूद मुझे इतिहास में अच्छे नंबर दिलवा गए। -पुरु बंसल, फेज चार, मोहाली
विज्ञापन

हेडमास्टर ने रोका, तभी जिंदगी में आगे बढ़ पाया

बचपन में पिता का साया उठ गया। मां ने कठिन मेहनत कर जीवनयापन के साथ संस्कार पूर्ण अच्छी शिक्षा दे जिंदगी बदल दी। दिवंगत शिक्षक को नमन! मेरे स्कूल टाइम में एक मास्टर निरंजन सिंह थे, जिनकी वजह से मेरी जिंदगी बन गई। सरकारी स्कूल में नौंवी की परीक्षा पास करने के बाद मेरा मन प्राइवेट स्कूल में जाने का हुआ। घर पर खूब दबाव बनाया। जब मैं स्कूल जाने लगा तो मास्टर निरंजन सिंह ने स्कूल के हेड मास्टर से कहा कि ये लड़का होनहार है। इसे जाने से रोकना होगा। बस फिर क्या उन्होंने टीसी देने से मना कर दिया। बाद में पता चला कि यदि प्राइवेट स्कूल जाता तो उसकी फीस काफी ज्यादा थी। स्टेशनरी में भी बहुत पैसा खर्च होना था, जो परिवार के लिए मुश्किल काम था। -सुभाष चंद्र पपनेजा, पंचकूला

शिक्षक ने भरा आत्मविश्वास चढ़ती गई सफलता की सीढ़ी
जिन्होंने मेरी जिंदगी बदल दी, वे थे मेरे स्कूल के प्राचार्य मदन लाल शर्मा। मैं बचपन से ही मेधावी छात्रा थी, लेकिन स्वभाव से डरपोक और आत्मविश्वास की कमी से जूझती रही। मेरा व्यक्तित्व निखारने में उन्हीं का योगदान रहा। मंच पर प्रभावी तरीके से बोलना उन्हीं से सीखा। इसी का परिणाम था कि कक्षा 9 में ही हरियाणा की बेस्ट स्पीकर बनीं। मेरी लेखन प्रतिभा को भी उन्होंने पहचाना और निखारा। 13 वर्ष की आयु में मैंने दो बाल काव्य संग्रह लिख डाले। आज मैं अंग्रेजी की प्रवक्ता हूं। अनेक राज्यस्तरीय कार्यक्रमों में मंच संचालन किया। अब तक सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। -धीरजा शर्मा, अंग्रेजी प्रवक्ता चंडीगढ़

...तो शायद आगे नहीं पढ़ पाती
जब मैं छोटी थी, तब मेरे पापा का एक्सीडेंट हो गया था और मेरी मां के पास इतने पैसे नहीं थे कि वो मुझे और मेरे भाई को पढ़ा सके, लेकिन मैं पढ़ना चाहती थी, तब मेरी वंदना टीचर ने पढ़ाई में काफी मदद की। उन्होंने बेटी की तरह पढ़ाया। आज मैं उनकी वजह से एक फार्मास्यूटिकल कंपनी में जॉब कर रही हूं। जब भी वो मुझे मिलती हैं तो मुझे मेरी मां जैसा ही प्यार देती हैं। -रेनू सूद
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें