मेरे भविष्य को उज्ज्वल बनाने में मेरे गुरु धनपत सिंह आईएएस (रिटायर्ड) की अहम भूमिका रही है। 12वीं पास करने के बाद मेरे पिता का देहांत हो गया था। परिवार की सभी जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई। आगे क्या होगा, कुछ समझ में नहीं आ रहा था। उस वक्त धनपत सिंह ने मुझे आर्थिक तथा मानसिक सहारा दिया। उन्होंने मुझे मजदूरी के साथ पढ़ाई भी जारी रखने के लिए प्रेरित किया। मैंने सरकारी नौकरी के लिए 15 बार पेपर व साक्षात्कार दिए, पर सफलता नहीं मिली। आखिर में 2002 में हरियाणा राज्य परिवहन विभाग में परिचालक की नौकरी मिली। उसके बाद 2013 में हरियाणा सरकार में चालक के पद पर नियुक्ति मिली। उन्हीं की प्रेरणा से आज मैं स्नातकोत्तर शिक्षा ग्रहण कर रहा हूं। साथ ही हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड में चालक के पद पर कार्यरत हूं। गुरु जी के बिना मेरी जिंदगी में इतना बड़ा बदलाव आना संभव नहीं था। -ब्रह्मानंद मेहरा, सेक्टर- 14 पंचकूला
लक्ष्मी बाबू ने मुझे हर कला में निपुण बनाया
मेरी विद्यार्थी आकृति को सुकृति देने में शिक्षक लक्ष्मी बाबू का अविस्मरणीय सहयोग रहा। उन्होंने मुझमें सुसंस्कार भरा। वे हर रविवार को मुझे आर्यसमाज ले जाते थे। हवन प्रार्थना के बाद सत्संग में बोलने के लिए प्रोत्साहित करते थे। भाषण देने की कला में प्रवीण किया। पहले संवाद को रट लो फिर आइने के सामने जोर-जोर से बोलो। ऐसा करने से मुझमें वाकपटूता का सृजन हुआ। मैं सामान्य विद्यार्थी रहते हुए स्कूल तथा इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षकों का चहेता बना। उसी इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर के बजाय सहायक प्राध्यापक में नियुक्ति मिली। अच्छा वक्ता होने के कारण आगे सेवाकाल में राष्ट्रभाषा और फेयरवेल समिति का अध्यक्ष बन अपने संस्थान निदेशक का भी चहेता बना। आम से खास बन गया। मैं आज भी लक्ष्मी बाबू को पूजता हूं। -बासुदेव प्रसाद, पचंकूला
जब इतिहास में दिलवाए अच्छे नंबर
मनोज कुमार बंसल को अध्यापक कहूं, मोटिवेटर कहूं या केयर टेकर। वे एक ऐसे शख्स हैं, जिनके लिए शायद किताबी शब्दकोश कम पड़ जाए। दसवीं क्लास में इतिहास विषय को लेकर मानसिक परेशान था। कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। ऐसा लग रहा था कि सब रटा जाएगा। लेकिन सर ने ऐसा पढ़ाया कि 17 दिन में पूरा विषय मेरी समझ में आ गया। और मैंने 100 में से 95 अंक हासिल किए। एक बात बता दूं मेरे टीचर मेरे पापा हैं, जो एक केमिस्ट्री के टीचर होने के बावजूद मुझे इतिहास में अच्छे नंबर दिलवा गए। -पुरु बंसल, फेज चार, मोहाली
बचपन में पिता का साया उठ गया। मां ने कठिन मेहनत कर जीवनयापन के साथ संस्कार पूर्ण अच्छी शिक्षा दे जिंदगी बदल दी। दिवंगत शिक्षक को नमन! मेरे स्कूल टाइम में एक मास्टर निरंजन सिंह थे, जिनकी वजह से मेरी जिंदगी बन गई। सरकारी स्कूल में नौंवी की परीक्षा पास करने के बाद मेरा मन प्राइवेट स्कूल में जाने का हुआ। घर पर खूब दबाव बनाया। जब मैं स्कूल जाने लगा तो मास्टर निरंजन सिंह ने स्कूल के हेड मास्टर से कहा कि ये लड़का होनहार है। इसे जाने से रोकना होगा। बस फिर क्या उन्होंने टीसी देने से मना कर दिया। बाद में पता चला कि यदि प्राइवेट स्कूल जाता तो उसकी फीस काफी ज्यादा थी। स्टेशनरी में भी बहुत पैसा खर्च होना था, जो परिवार के लिए मुश्किल काम था। -सुभाष चंद्र पपनेजा, पंचकूला
शिक्षक ने भरा आत्मविश्वास चढ़ती गई सफलता की सीढ़ी
जिन्होंने मेरी जिंदगी बदल दी, वे थे मेरे स्कूल के प्राचार्य मदन लाल शर्मा। मैं बचपन से ही मेधावी छात्रा थी, लेकिन स्वभाव से डरपोक और आत्मविश्वास की कमी से जूझती रही। मेरा व्यक्तित्व निखारने में उन्हीं का योगदान रहा। मंच पर प्रभावी तरीके से बोलना उन्हीं से सीखा। इसी का परिणाम था कि कक्षा 9 में ही हरियाणा की बेस्ट स्पीकर बनीं। मेरी लेखन प्रतिभा को भी उन्होंने पहचाना और निखारा। 13 वर्ष की आयु में मैंने दो बाल काव्य संग्रह लिख डाले। आज मैं अंग्रेजी की प्रवक्ता हूं। अनेक राज्यस्तरीय कार्यक्रमों में मंच संचालन किया। अब तक सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। -धीरजा शर्मा, अंग्रेजी प्रवक्ता चंडीगढ़
...तो शायद आगे नहीं पढ़ पाती
जब मैं छोटी थी, तब मेरे पापा का एक्सीडेंट हो गया था और मेरी मां के पास इतने पैसे नहीं थे कि वो मुझे और मेरे भाई को पढ़ा सके, लेकिन मैं पढ़ना चाहती थी, तब मेरी वंदना टीचर ने पढ़ाई में काफी मदद की। उन्होंने बेटी की तरह पढ़ाया। आज मैं उनकी वजह से एक फार्मास्यूटिकल कंपनी में जॉब कर रही हूं। जब भी वो मुझे मिलती हैं तो मुझे मेरी मां जैसा ही प्यार देती हैं। -रेनू सूद