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सरकारी समाधान : एसवाईएल का नहीं मिला पानी, अब हरियाणा में तालाबों से सिंचाई की तैयारी

Mon, 19 Jul 2021 04:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा सोमदत्त शर्मा, चंडीगढ़

सार

  • अंबाला और झज्जर में तालाबों से शुरू हुई खेतों की सिंचाई
  • मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट, हर खेत तक पानी पहुंचाने की योजना
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demo pic... - फोटो : irrigation pattern
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विस्तार
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सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर का मुद्दा नहीं सुलझते देख हरियाणा सरकार ने तालाबों से सिंचाई का नया फार्मूला निकाला है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत अंबाला के गांव तेपला और झज्जर के गांव जाखौदा के दो तालाबों से सिंचाई की शुरुआत हो चुकी है। यहां से सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब सरकार ने फैसला लिया है कि प्रदेश के कुल 18 हजार तालाबों में से सबसे पहले ओवरफ्लो 1868 तालाबों के पानी को सिंचाई योग्य बनाया जाएगा। प्रति तालाब 50 एकड़ भूमि को सिंचित करने के लक्ष्य के तहत 93400 एकड़ भूमि को सिंचित किया जा सकेगा। हरियाणा पोंड एंड वेस्ट मैनेजमेंट अथॉरिटी ने इस पर काम शुरू कर दिया है। अगर सब कुछ सामान्य रहा तो वर्ष 2022 तक इन तालाबों को ठीक कर लिया जाएगा। 

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तालाबों से सिंचाई मुख्यमंत्री मनोहर लाल का ड्रीम प्रोजेक्ट है। तालाब प्राधिकरण के अधिकारियों के बैठक में मुख्यमंत्री खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं और लगातार इसकी प्रगति रिपोर्ट ले रहे हैं। शुरू से ही मुख्यमंत्री सूक्ष्म सिंचाई और हर खेत तक पानी को लेकर जोर दे रहे हैं। पोंड अथॉरिटी के अधिकारी बताते हैं कि इस योजना पर तेजी से काम चल रहा है। 

वेटलैंड तकनीक से साफ किया जा रहा दूषित पानी
कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड टेक्नोलॉजी के माध्यम से तालाबों के दूषित पानी को ट्रीट किया जाता है। इसके बाद यह पानी पशुओं के पीने और सिंचाई करने योग्य हो जाता है। तालाब से नाली या फिर खेत तक पाइप डाला जाता है। विभाग यह भी योजना बना रहा है कि ऐसे तालाबों से सीधे खेतों तक नाला ले जाया जाए। पंचायत विभाग की ओर से पानी की सप्लाई को लेकर जेनरेटर आदि की व्यवस्था की भी योजना है।
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सेटेलाइट से सर्वे कराएगी सरकार
हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (हरसेक) के माध्यम से प्रदेश के तालाबों का सैटेलाइट सर्वे कराया जाएगा। वर्ष 1957 के राजस्व रिकॉर्ड और सैटेलाइट इमेज के माध्यम से तालाबों को तलाशा जाएगा। गांवों में तालाबों की जमीन पर किए गए कब्जों को छुड़वाने के लिए ऐसा किया जाएगा। पोंड अथॉरिटी की कार्यकारी वाइस चेयरपर्सन प्रभाकर कुमार वर्मा समेत तकनीकी सलाहकार हरिप्रकाश शर्मा ने बताया कि तालाबों को बचाने के लिए गंभीरता से काम किया जा रहा है।  

33 फीसदी भूमि की होती है नहरी पानी से सिंचाई
हरियाणा में 40 लाख हेक्टेयर जमीन कृषि योग्य है। इसमें 33 फीसदी भूमि की सिंचाई नहरी पानी, 50 फीसदी की सिंचाई ट्यूबवेलों से होती है। 17 फीसदी भूमि को बारिश का सहारा है। वहीं, इस समय प्रदेश को 11,180 क्यूसेक पानी मिल रहा है। 9500 क्यूसेक पानी भाखड़ा से और 1680 क्यूसेक पानी यमुना से मिलता है। हरियाणा को पंजाब से 3.5 मिलियन एकड़ फुट पानी मिलना चाहिए, लेकिन अभी पंजाब से 1.62 मिलियन एकड़ फुट पानी ही मिल रहा है। एसवाईएल को लेकर सुप्रीम कोर्ट हरियाणा के हक में फैसला दे चुका है, लेकिन पानी अभी नहीं मिला है। इस कारण दक्षिण हरियाणा के कई जिलों में पीने के पानी से लेकर सिंचाई को लेकर दिक्कत है।

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