कमेटी ने प्रोफेसर को दोषी पाया और इस तथ्य को 16 नवंबर को हुई मीटिंग में रखा गया था। हालांकि, इस बारे में प्रोफेसर विकास गौतम से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
रिसर्च में गड़बड़ी के आरोप से दोषमुक्त हुए डॉक्टर
गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में एक-दूसरे मामले में रिसर्च में गड़बड़ी करने के आरोप से दो डॉक्टरों को दोषमुक्त कर दिया गया है। उनके खिलाफ कोई ठोस सुबूत नहीं मिले। हालांकि, दोनों डॉक्टरों को एडवाइजरी जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। पीजीआई के एंडोक्राइनालोजी डिपार्टमेंट के डॉक्टर पिनाकी दत्ता और यूरोलाजी डिपार्टमेंट के डॉ. संतोष कुमार पर एक रिसर्च पेपर में गड़बड़ी के आरोप लगे थे।
इस मामले में डॉ. नंदिता कक्कड़ ने शिकायत की थी। कक्कड़ का आरोप था कि डॉ. दत्ता ने जिस बायोप्सी नमूनों की जांच का दावा किया था, वह उनकी प्रयोगशाला में कभी आए नहीं। तीन साल तक यह मुद्दा चलता रहा। कभी कोई जांच तो कभी गवर्निंग बॉडी में नए दिशा-निर्देश। बाद में प्रोफेसर भल्ला की एक कमेटी ने पाया कि दोनों डॉक्टरों पर जो आरोप लगे थे, वे गलत थे। उनके खिलाफ कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ। अब उन्हें एडवाइजरी जारी करने के निर्देश हुए हैं। साथ ही भविष्य में उन्हें सतर्क रहने को कहा गया है।