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चंडीगढ़ः यौन शोषण के आरोपी पीजीआई के प्रोफेसर के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई

Fri, 04 Jan 2019 09:23 AM IST
खुशबू गोयल आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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यौन शोषण के आरोपी पीजीआई के माइक्रोबायोलाजी के प्रो. विकास गौतम के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। पिछले महीने हुई गवर्निंग बॉडी की मीटिंग के मिनट्स के मुताबिक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए थे। सख्त कार्रवाई की श्रेणी में तीन तरह की कार्रवाई आती हैं। 

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पहली श्रेणी में डिमोशन किया जा सकता है। प्रोफेसर के पद पर से हटाकर एडिशनल प्रोफेसर बनाया जा सकता है। दूसरी श्रेणी में पीजीआई से निकाला जा सकता है। तीसरी श्रेणी में किसी भी सरकारी संस्थान में नौकरी पर नहीं रखा जाएगा। तीनों श्रेणी के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। गवर्निंग मीटिंग के मिनट्स आने के बाद उन्हें चार्जशीट भी किया जाएगा।

 इस दौरान एक और मौका दिया जाएगा। वह अपनी बात रख सकेंगे और बयानों की फिर जांच की जाएगी। उन तथ्यों को दोबारा से गवर्निंग बॉडी में रखा जाएगा। मीटिंग में जो निर्णय होगा, उसके आधार पर पीजीआई कार्रवाई करेगा। प्रोफेसर पर 2018 में एक रिसर्च आफिसर ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे। इसकी जांच पीजीआई की सेक्सुअल हरासमेंट कमेटी ने किया।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
कमेटी ने प्रोफेसर को दोषी पाया और इस तथ्य को 16 नवंबर को हुई मीटिंग में रखा गया था। हालांकि, इस बारे में प्रोफेसर विकास गौतम से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

रिसर्च में गड़बड़ी के आरोप से दोषमुक्त हुए डॉक्टर 
गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में एक-दूसरे मामले में रिसर्च में गड़बड़ी करने के आरोप से दो डॉक्टरों को दोषमुक्त कर दिया गया है। उनके खिलाफ कोई ठोस सुबूत नहीं मिले। हालांकि, दोनों डॉक्टरों को एडवाइजरी जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। पीजीआई के एंडोक्राइनालोजी डिपार्टमेंट के डॉक्टर पिनाकी दत्ता और यूरोलाजी डिपार्टमेंट के डॉ. संतोष कुमार पर एक रिसर्च पेपर में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। 

इस मामले में डॉ. नंदिता कक्कड़ ने शिकायत की थी। कक्कड़ का आरोप था कि डॉ. दत्ता ने जिस बायोप्सी नमूनों की जांच का दावा किया था, वह उनकी प्रयोगशाला में कभी आए नहीं। तीन साल तक यह मुद्दा चलता रहा। कभी कोई जांच तो कभी गवर्निंग बॉडी में नए दिशा-निर्देश। बाद में प्रोफेसर भल्ला की एक कमेटी ने पाया कि दोनों डॉक्टरों पर जो आरोप लगे थे, वे गलत थे। उनके खिलाफ कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ। अब उन्हें एडवाइजरी जारी करने के निर्देश हुए हैं। साथ ही भविष्य में उन्हें सतर्क रहने को कहा गया है।
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