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ये हौसला कैसे झुके: मंगलयान से आरुषि के कैरियर ने भरी उड़ान, चंद्रयान-2 की असफलता झेली, अब रचा इतिहास

Thu, 24 Aug 2023 12:07 PM IST
निवेदिता वर्मा वैभव शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला (हरियाणा)

सार

आरुषि के ससुर डॉ. सुरेंद्र कुमार शर्मा और सास डीएवी स्कूल बराड़ा में उप प्रधानचार्या संगीता शर्मा व परिवार के अन्य सदस्य चंद्रयान-3 की लैंडिंग को सेक्टर-9 स्थित आवास में टीवी पर देख रहे थे। जैसे ही चंद्रयान चंद्रमा पर उतरा, सभी ने खुशी जाहिर की।
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परिवार के साथ इंजीनियर आरुषि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंद्रयान-3 की सफलता से पूरा देश गद्गद् है। इसमें शामिल इसरो के वैज्ञानिकों के हौसले और जज्बे के सभी कायल हो चुके हैं। अंबाला की रहने वाली इसरो की साइंटिस्ट इंजीनियर आरुषि की कहानी काफी प्रेरणा देने वाली है। 

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आरुषि के करियर में सबसे बड़ी शुरुआत मंगलयान प्रोजेक्ट से हुई थी। इसके बाद उन्होंने चंद्रयान-2 के लिए काफी मेहनत की। उन्होंने ही नहीं इस प्रोजेक्ट के जुड़े हर व्यक्ति ने जी जान लगा दिया था। आरुषि बताती हैं कि जब चंद्रयान-2 सफल नहीं हुआ तो वैज्ञानिक काफी निराश हुए थे। मगर हर रात के बाद दिन आता है वैसे ही चंद्रयान-3 आया और हम सभी इसको सफल बनाने और पिछली कमियों से सीख लेने के काम में जुट गए और अब वह गौरवान्वित पल आ गया है जब चंद्रयान-3 सफलता से चंद्रमा पर लैंड हो गया। ऐसी ही सफलता की देश को जरूरत थी। 

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उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा देश को सभी से आगे रखा और इसी बात ने उन्हें बल दिया। चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर उतरने के बाद आरुषि और उनके साथियों का काम शुरू हुआ। वह विक्रम लैंडर पर अपना कार्य करने में देर रात तक जुटी रहीं।



सुबह निकलती थीं आरुषि, देर रात को आती
आरुषि के पति अंबाला निवासी सिद्धार्थ बताते हैं कि चंद्रयान-3 के लिए आरुषि ने बहुत मेहनत की है। वह सुबह घर से निकलती थीं इसके बाद कभी रात को 1 बजे तो कभी 2 बजे घर आती थीं। इस प्रोजेक्ट को हर हाल में सफल बनाना था। इसरो की टीम ने ये कर दिखाया। आज पूरा देश उन पर गर्व कर रहा है। 
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सिद्धार्थ ने बताया कि हम दोनों ही आईआईएसटी से पढ़े हैं। दोनों का ही सपना अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े कार्यों में था। आरुषि इसरो चली गईं और वे टेलीमेट्री कमांड सेंटर में कार्यरत हैं। उनका काम लॉचिंग के बाद शुरू होता है। अब चंद्रयान के बाद वह आगे भी प्रोजेक्ट करेंगी।



बोलती कम हैं पढ़ती अधिक हैं
आरुषि के ससुर डॉ. सुरेंद्र कुमार शर्मा और सास डीएवी स्कूल बराड़ा में उप प्रधानचार्या संगीता शर्मा व परिवार के अन्य सदस्य चंद्रयान-3 की लैंडिंग को सेक्टर-9 स्थित आवास में टीवी पर देख रहे थे। जैसे ही चंद्रयान चंद्रमा पर उतरा, सभी ने खुशी जाहिर की। एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। उन्होंने बताया कि सिद्धार्थ और आरुषि की शादी वर्ष 2017 में अंबाला में ही हुई थी। आरुषि कम बोलती हैं और पढ़ती अधिक हैं। उन्हें हमेशा से ही देश के लिए कुछ अच्छा करना था और आगे भी करेंगी। परिवार व सगे संबंधियों में खुशी का माहौल है।

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