उसने भार्गव से पूछा कि कहां से हो, भार्गव ने जवाब दिया कि वे रावलपिंडी से। रावलपिंडी में कहां से, तो कहा कि माल रोड से। इसी दौरान गांववालों ने पाकिस्तानी रेंजर को बुला लिया। रेंजर ने भार्गव से कलमा पढ़ने को कहा, लेकिन वे पढ़ नहीं पाए और पकड़े गए। बाद में उन्हें पाकिस्तानी सेना के हवाले कर दिया गया। वे सिर्फ 13 घंटे ही अपनी पहचान छिपा पाए थे।
रात में सोने नहीं देते थे पाकिस्तानी सैनिक
भार्गव ने बताया कि पाकिस्तानी अफसर रात में ही पूछताछ करते थे। जब वे सोने जाते थे, तभी अफसर पहुंच जाते और पूछने लगते कि प्लान क्या था। हर सवाल पर ना कहना बेहद मुश्किल होता था। पायलट्स की पूरी जानकारी मांगी जाती थी। जब पायलट के नाम पूछे जाते थे तो मैं अपने भाई-बहनों के नाम ही बताता था। जब उन्होंने पूछा कि स्कवाड्रन का बेस्ट पायलट कौन था, तो जवाब दिया कि आपके सामने खड़ा है। जवाब सुनते ही अफसर सन्न रह गए और बिना कुछ बोले चलते बने।
भार्गव ने बताया कि कई वर्षों तक उन्हें यातनाएं झेलनी पड़ी थीं। इस दौरान वे स्पाइन इंजरी का शिकार हो गए। भयंकर दर्द की वजह से उनका चलना फिरना मुश्किल हो गया था। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनका कहना है कि वतन लौटने के बाद वे फिर एयरफोर्स का जहाज नहीं उड़ा पाए, जो आज भी उनके दिल में मलाल है।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने उन्हें इस आस पर छोड़ा था कि इंदिरा गांधी पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों को रिहा करेगी। उस दौरान पाकिस्तान ने भारत के 12 पायलटों, 6 आर्मी अफसरों सहित 600 जवानों को रिहा किया था। अभिनंदन की रिहाई से वे काफी खुश हैं कि भारत की कूटनीति काम आई, जो मात्र दो दिन में वह रिहा हो गए।