पंजाब द्वारा चंडीगढ़ पर अपना दावा जताने के बाद अब हरियाणा ने इसका जवाब देने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। मंगलवार को विधानसभा के विशेष सत्र में चंडीगढ़ पर हरियाणा के हक के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया जाएगा। साथ ही इसे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। इतना ही नहीं पंजाब सरकार को घेरने के लिए हरियाणा की ओर से एसवाईएल का पानी और 400 हिंदी भाषी गांवों की वापसी का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया जाएगा।
एक अप्रैल को पंजाब सरकार की ओर से विधानसभा के विशेष सत्र में प्रस्ताव पारित किया था कि चंडीगढ़ पर पंजाब का हक है और इसे पूरी तरह से पंजाब को सौंपा जाए। इसके बाद से मामला गरमा गया। पूरे मामले पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने खुद मोर्चा संभाला हुआ है। मुख्यमंत्री पहले भी कह चुके हैं कि चंडीगढ़ पर हरियाणा का पूरा हक है और भविष्य में भी रहेगा। सीएम यहां तक कह चुके हैं कि पंजाब पहले हरियाणा को उसके हक का पानी दे, इसके बाद दूसरी बात करे।
हरियाणा में विपक्षी नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अभय सिंह चौटाला ने भी पंजाब सरकार के दावे पर एतराज जताते हुए चंडीगढ़ पर हरियाणा का पूरा हक करार दिया। चंडीगढ़ मामले को लेकर हरियाणा कैबिनेट ने पांच अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया। मंगलवार सुबह विशेष सत्र शुरू होगा, इससे पहले 9.30 बजे बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक होगी।
बीबीएमबी का मुद्दा उठा सकता है विपक्ष
विशेष सत्र में नेता प्रतिपक्ष बीबीएमबी का मुद्दा भी उठा सकते हैं। पहले बीबीएमबी में पंजाब व हरियाणा से एक-एक सदस्य होता था लेकिन संशोधन के तहत अब इसमें अन्य राज्यों से सदस्य लिए जाएंगे। इसको लेकर पहले भी विपक्ष सरकार पर हमलावर हो चुका है। पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा बजट सत्र में भी यह मामला उठा चुके हैं। कांग्रेस इस बात को लेकर सरकार पर दबाव बनाएगी कि हरियाणा और केंद्र में भाजपा की सरकार है, इसलिए बीबीएमबी में हरियाणा की भागीदारी पहले की तरह बहाल की जाए।