यूटी प्रशासन ने शहर के विभिन्न इलाकों, लाल डोरा से बाहर चल रहे अवैध निर्माण को रोकने और उस पर कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है। मंगलवार को यूटी सचिवालय में वित्त सचिव अजॉय कुमार सिंगला की अध्यक्षता में एक बैठक हुई।
इसमें निर्णय लिया गया कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के लिए एरिया एसडीएम की निगरानी में एक स्पेशल सेल का गठन किया जाएगा।
लाल डोरे के बाहर हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ यूटी प्रशासन ने वर्ष 2016 में सभी गांवों का ग्राउंड लेवल पर सर्वे करवाया था। पटवारियों की टीम ने गांव-गांव जाकर रिपोर्ट तैयार की थी।
मंगलवार को हुई बैठक में शहर में तेजी से हो रहे अवैध निर्माण पर चर्चा की गई। लाल डोरे के बाहर भी जगह-जगह निर्माण हो रहा है। सैकड़ों मकान भी बन गए हैं। प्रशासन की तरफ से बनाए जाने वाले सेल का मुख्य काम हो रहे अवैध निर्माण की पहचान करना और फिर उसके खिलाफ कार्रवाई करना रहेगा।
बैठक में डीसी मनदीप सिंह बराड़, नगर निगम कमिश्नर केके यादव, सभी एसडीएम व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। गौरतलब है कि गांव जो कि अब नगर निगम में शामिल हो चुके हैं, वहां लोगों ने लाल डोरा से बाहर एग्रीकल्चर लैंड में बड़ी कोठियां खड़ी कर दी हैं। सैकड़ों छोटी इंडस्ट्री चल रही हैं। हालत ये हैं कि लाल डोरा के अंदर आबादी कम है, लेकिन बाहर उससे कहीं ज्यादा है। इन आशियानों को ढहाना प्रशासन के लिए भी आसान नहीं होगा।
अर्बन प्लॉनिंग डिपार्टमेंट ने नगर निगम कमिश्नर, डीसी और एसडीएम को लिखा लेटर
यूटी प्रशासन के अर्बन प्लॉनिंग डिपार्टमेंट ने बीते दिनों नगर निगम के कमिश्नर, डीसी और एसडीएम को गांव-कॉलोनी में हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के लिए लिखा है। यूटी अर्बन प्लॉनिंग डिपार्टमेंट ने कहा है कि शहर के पेरीफेरी एरिया में तेजी से चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के विपरीत निर्माण किया जा रहा है। इन निर्माणों को रोका नहीं गया तो मास्टर प्लान के अनुसार इन एरिया को विकसित करने के लिए जगह ही नहीं बचेगी।
लेटर में कहा गया है कि बीते कुछ साल में निर्माण की गति में तेजी आई है। इससे शहर की सूरत बदल रही है। विभाग की तरफ से अवैध निर्माण को दिखाने के लिए कई रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई हैं। ज्यादातर निर्माण गांव और अर्द्धशहरी इलाके जिनमें किशनगढ़, मनीमाजरा, मलोया, बापूधाम के कुछ हिस्से, खुड्डा अलीशेर, कैंबवाला, रायपुर, दड़वा आदि का क्षेत्रफल बढ़ गया है। भू-माफिया यहां तेजी से अवैध निर्माण कर रहे हैं।
गांवों के नगर निगम में शामिल होने के बाद से आई तेजी
प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 13 गांवों के नगर निगम में शामिल होने के बाद से अवैध निर्माण में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि इन इलाकों में ज्यादातर निर्माण किराये पर देने के लिए छोटे-छोटे फ्लैट्स का किया जा रहा है। यह छोटे फ्लैट्स सुरक्षा के मानकों को भी पूरा नहीं करते हैं। कुछ इलाकों में छोटे-छोटे प्लॉट भी काटकर बेचे जा रहे हैं। लाभ कमाने के लिए खेती की जमीनों पर निर्माण कर रिहायशी मकान के रूप में बदला जा रहा है। गौरतलब है कि 13 गांवों के नगर निगम में शामिल होने के बाद से यहां की जमीनों की कीमत कई गुणा बढ़ गई है।