कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग को मजबूत करने के लिए सरकार ने नई तैनाती के साथ जरूरत के मुताबिक पुनर्नियोजन का आदेश दिया था। इस आदेश की आड़ में चंडीगढ़ के जीएमएसएच-16 के मलाईदार पदों से सेवानिवृत्त कुछ कर्मचारियों को फिर से उन्हीं पदों पर तैनात कर दिया गया है।
पुनर्नियोजित कर्मचारी कागजों पर तो किसी अन्य काम के लिए रखे गए हैं, लेकिन वह अब भी उन्हीं पदों पर बने हुए हैं, जहां पहले कार्यरत थे। अस्पताल प्रशासन भी इस बात को मान रहा है कि उन कर्मचारियों की तैनाती अन्य पदों के लिए की गई थी। ऐसे में अधिकारियों की मिलीभगत साफ नजर आ रही है।
अस्पताल के जिन मलाईदार पदों पर पुनर्नियोजन से सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुन: तैनाती की गई है, उनमें स्टोर परचेज, स्टेशनरी प्रभारी, मेडिकल बिल रिम्बर्समेंट, आयुष्मान योजना का क्लर्क और फार्मासिस्ट के दो पद शामिल हैं। कागजों में इन पदों पर काम कर रहे पुनर्नियोजित कर्मचारियों को तकनीकी स्टाफ, सुरक्षाकर्मी और मल्टीपरपज हेल्थ वर्कर के पद पर दिखाया गया है। इसे लेकर अस्पताल के अन्य कर्मचारियों में रोष तो है लेकिन वह विरोध करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे।
पुनर्नियोजन में रखे गए यह सभी कर्मचारी अपनी पूर्व तैनाती वाले स्थल पर ही सहायक के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य चार्ज लेने वाले नए कर्मचारियों को उस पटल की पूर्ण जानकारी देना है।
-डॉ. वीके नागपाल, चिकित्सा अधीक्षक
पूर्व में तैनात किए गए कर्मचारी किस मानक के अनुसार रखे गए हैं, इस बारे में कोई भी जानकारी देने से पहले मुझे उस समय का रिकार्ड चेक करना पड़ेगा। इस संबंध में जानकारी लेने के बाद ही कुछ कहना उचित होगा।
-डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक
अगर 2002 के सरकार के आदेश पर गौर करें तो पुनर्नियोजन नहीं करने का निर्देश है। इसके पीछे मुख्य वजह बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर देना था। आगे चलकर इस आदेश में संशोधन कर तैनाती का मौका दिया गया, लेकिन ऐसी स्थिति में उस क्षेत्र के प्रशासन को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि पुनर्नियोजित कर्मचारी पुन: अपने पुराने पद पर तैनात न होने पाएं।
-डॉ. राकेश गुप्ता, पूर्व स्वास्थ्य निदेशक, पंजाब