चंडीगढ़। शहर में बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने की परियोजना की धीमी गति पर प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल काफी खफा हैं। पिछले 5 साल में कंपनी पायलट प्रोजेक्ट का 50 फीसदी ही काम पूरा कर पाई है। कंपनी को चेतावनी देने के बाद धर्मपाल अब इस मामले को केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के साथ मंगलवार को होने वाली बैठक में उठाएंगे।
बीते दिनों पार्षद और अधिकारियों की हुई बैठक में भी प्रशासक के सलाहकार ने स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी को चेतावनी देने के निर्देश दिए थे। पार्षदों ने यह मुद्दा उठाया था कि स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी बहुत धीमी गति से पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। 2016 में इस परियोजना की शुरुआत हुई थी, लेकिन अब तक पायलट प्रोजेक्ट भी पूरा नहीं हो पाया है। कंपनी लापरवाही से काम कर रही है और बहुत जगह खुले तारों को छोड़ दिया गया है, जिस पर सलाहकार धर्मपाल काफी नाराज हुए थे और उन्होंने चीफ इंजीनियर सीबी ओझा को निर्देश दिए कि वह कंपनी को चेतावनी दें। हालांकि इसके बावजूद कोई असर नहीं हुआ। अब सलाहकार ने फैसला किया है कि वह मंत्रालय के साथ इस मुद्दे को उठाएंगे। बता दें कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत इंडस्ट्रियल एरिया, सेक्टर-31, 47, 48, 29 और छह गांवों में लगाए जाने थे, लेकिन अब तक यह काम पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा सलाहकार धर्मपाल ने शहर के विभिन्न चौक को भी ठीक करने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि शहर के प्रवेश द्वारों पर मौजूद चौक का खास तौर पर सौंदर्यीकरण किया जाए।
लंगर के लिए पीजीआई के अंदर जगह मुहैया कराने के निर्देश
प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल सोमवार को विभिन्न अधिकारियों के साथ पीजीआई की तरफ और औचक निरीक्षण पर निकले। इस दौरान उन्होंने देखा कि पीजीआई के बाहर लगने वाले लंगर में लोगों की भारी भीड़ है। इससे वह खफा नजर आए। उन्होंने कहा कि लंगर लगाना बुरी बात नहीं है, लेकिन इसको संस्थान के अंदर लगाना चाहिए। बाहर लगने वाले लंगर से शहर की खूबसूरती तो खराब होती ही है बल्कि खुले में भोजन बांटने से स्वास्थ्य को भी नुकसान हो सकता है। धर्मपाल ने पीजीआई को निर्देश दिए कि वह उन संस्थाओं को अंदर जगह मुहैया कराए, जो बाहर लंगर बांटने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि पीजीआई के अंदर कहीं भी हॉल आदि ऐसी संस्थाओं को मुहैया कराया जाए, ताकि वह स्वच्छता के साथ लंगर का वितरण कर सकें। यह लोगों और शहर दोनों के लिए काफी लाभदायक साबित होगा। दरअसल पीजीआई के बाहर शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाएं मरीजों के साथ आने वाले उनके रिश्तेदार व परिजन को मुफ्त में खाना देते हैं। इसके लिए बाहर लंगर लगाए जाते हैं। लंगर के लिए काफी लंबी लंबी लाइनें रोजाना लगती है।