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राष्ट्रीय सिनेमा दिवस: कल तक जो सिनेमा हाॅल थे शहर की जान, आज पड़े वीरान... खर्च निकालना भी मुश्किल

Fri, 20 Sep 2024 11:21 AM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

केसी, निर्माण, किरण व बत्रा थिएटर एक समय में सिटी ब्यूटीफुल की शान थे। इन थिएटरों के बाहर सिनेमा के शौकीन लंबी- लंबी कतारों में टिकट के लिए लाइन में लगते थे। साइकिल सवार से लेकर कार सवार फिल्में देखने के लिए पहुंचते थे।
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किरण सिनेमा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज यहां तारीफें हैं, वाहवाही है, ये कमरा कल एक ताली का तरसेगा...यह एक नज़्म की पंक्तियां है। जो कभी चंडीगढ़ की जान होने वाले पुराने सिनेमा हाॅल, जो आज वीरान पड़े है, पर एकदम सटीक बैठती है। एक समय पांच सौ सीट वाले हाॅल भी हाउसफुल हो जाते था। वहीं, आज 150 सीटर वाले मिनी मल्टीप्लेक्स नहीं भर पा रहे है। आज राष्ट्रीय सिनेमा दिवस है।
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पहले सिनेमा हाॅल में पांच सौ सीटें होने के बावजूद लोगों को ब्लैक में टिकट लेकर फिल्म देखनी पड़ती थी। शुक्रवार को लोग छुट्टी लेकर फिल्मे देखने के लिए पहुंचते थे।

वास्तुकार विनोद जोशी ने बताया जैसे पुराना समय में लोगों में सिनेमा देखना का जोश होता था। अब वैसा नहीं रहा है। लोगों ने अपने घरों पर थिएटर बना रहे है। इसके साथ लोगों ने सिनेमाघरों में आना बंद कर दिया है, जिसके चलते थिएटरों का खर्चा नहीं निकल पा रहा था। आलम यह है कि मिनी मल्टीप्लेक्स भी नहीं भर पा रहे है। वहीं, सेक्टर-17 नीलम थिएटर को मल्टीप्लेक्स इस साल के अंत तक मल्टीप्लेक्स बनाने की योजना है।
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केसी थिएटर -सेक्टर -17
बत्रा थिएटर- सेक्टर-37
किरण थिएटर- सेक्टक-22
निर्माण - सेक्टर-32

पुराने सिनेमा का दौर
साल 1882 में पहली बार मैंने सिनेमा थिएटर में देखा था। सिनेमा के बाहर लंबी -लंबी लाइन होती थी। लोगों का उत्साह देखने लायक होता था। थिएटर 500 सीटर होने के बावजूद भी लोग अपनी बारी का इंतजार करते नजर आते थे। - संजीव चड्ढा

पूरे शहर में थे पांच थिएटर

मुझे याद है। 90 के दशक में सिनेमा देखना हमारा सबसे बड़ा शौक होता था। नई फिल्म को पहले दिन और पहला शो के साथ देखने का एक मजा होता था। - राज कुमार गंभीर

बालकनी टिकट साढ़े चार रुपये की 

पुराने थिएटरों में तीन तरह की सीटें होती थी। अपर  लोअर व बालकनी। अपर की टिकट 3 रुपये, लोअर की टिकट दो रुपये व बालकनी सीट की टिकट साढ़े चार रुपये की होती थी। -नवनीत शर्मा
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