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चंडीगढ़: वित्तीय घाटा और कर्मचारियों की भारी कमी, गलत फैसलों की वजह से डूब रहा सिटको

Mon, 09 Aug 2021 02:21 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सिटको में लगभग 1200 कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें लगभग 650 नियमित हैं, जबकि बाकी सिटको कांट्रेक्ट और आउटसोर्स के जरिए काम पर लगे हुए हैं। सिटको में नियमित भर्ती हुए भी 15 साल से ज्यादा समय बीत चुका है, जो कर्मी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उनकी जगह पर नए कर्मियों की भर्ती नहीं हो रही है।
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होटल शिवालिक व्यू व रेस्टोरेंट स्टॉप एंड स्टेअर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एंड टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन (सिटको) एक तरफ घाटे और दूसरी तरफ कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। आलम यह है कि कर्मचारियों की तनख्वाह भी एफडी के बदले लोन लेकर दी जा रही है।

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वहीं, कर्मचारियों को लीव इन कैशमेंट भी कई महीनों बाद मिल रही है। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन के गलत फैसलों की वजह से ही सिटको डूब रहा है। यही कारण है कि अब प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल सिटको को लेकर जल्द बैठक बुलाने वाले हैं।

सेक्टर-17 के शिवालिक व्यू होटल के दूसरे तल को बंद कर दिया गया है, क्योंकि सिटको के पास इतने कर्मचारी नहीं हैं कि होटल के दूसरे तल पर मौजूद करीब 24 कमरों में सर्विस दी जा सके। इससे होटल को रोजाना करीब एक लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
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इस होटल में कुल करीब 100 कमरे हैं। इसके अलावा सेक्टर-34 स्थित सिटको का रेस्टोरेंट ड्रॉप इन और सेक्टर-10 स्थित रेस्टोरेंट स्टॉप एंड स्टेअर भी बंद पड़ा है। सेक्टर-24 स्थित होटल पार्क व्यू को छोड़ अन्य होटल भी सिटको को कुछ खास लाभ नहीं दे पा रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर कई बार इन्हें घाटे से उबारने की कोशिश हुई, लेकिन हर बार सारे प्रयास बेमानी साबित हुए।

सिटको के पेट्रोप पंप, सुखना लेक पर बोटिंग आदि ही लाभ में हैं, जिनसे सिटको का खर्च चल रहा है। जुलाई के महीने में सेक्टर-10 स्थित माउंट व्यू होटल ने भी करीब 1 करोड़ 80 लाख का व्यापार किया है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सिटको का घाटा कोरोना की वजह से भी बढ़ा है, क्योंकि कोरोना ने होटल, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र पर काफी बुरा असर डाला है।

होटल चलाने वाले पेट्रोल पंप पर दे रहे ड्यूटी
सिटको में एक बड़ी समस्या है कि जिस व्यक्ति ने जिस काम के लिए ट्रेनिंग ली है या अनुभव प्राप्त किया है, उससे वह काम छोड़ अन्य काम कराए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए सीनियर फूड व बेवरेजेज (एफ एंड बी) मैनेजर, जो होटल में अपनी बेहतर सेवा दे सकता है, उसे पेट्रोल पंप पर लगाया गया है, जबकि शिवालिक होटल में एक भी एफ एंड बी मैनेजर नही है। जो पेट्रोल पंप के मैनेजर स्तर के अनुभवी कर्मचारी हैं, उनकी ड्यूटी ऐसी जगह लगाई गई है, जहां कोई काम ही नहीं है। इसके अलावा विभाग के अहम पदों पर नियमित कर्मी नहीं हैं। ठेके पर काम करने वाले कर्मी ही बड़े फैसले लेते हैं। कई बार पैसों को लेकर हुए हेरफेर की शिकायतें भी आ चुकी हैं।

होटल चलाने का व्यवसाय लेकिन बेहतर मार्केटिंग की कमी
सिटको तीन से पांच सितारा होटल, कई रेस्टोरेंट व ढाबे चलाता है, लेकिन मार्केटिंग की काफी कमी है। निजी होटल ग्राहकों को लुभाने के लिए आए दिन नए-नए ऑफर देते हैं और फिर सोशल मीडिया व वेबसाइट आदि के जरिए उसे लोगों तक पहुंचाया जाता है, लेकिन सिटको में ऐसा कम ही किया जाता है।

यही कारण है कि वर्तमान में भी शहर के जेडब्ल्यू मैरियट होटल में 55 फीसदी कमरे फुल हैं और बीते महीने सिटको के सबसे महंगे होटल माउंट व्यू से दोगुना राजस्व कमाया है। कोरोना से पहले जेडब्ल्यू 85 फीसदी कमरे आमतौर पर बुक रहते थे। इसके अलावा किसी भी विभाग के लिए अकाउंट्स विभाग रीढ़ की हड्डी होती है, लेकिन सिटको में अकाउंट्स विभाग में भी कर्मियों की काफी ज्यादा कमी है।
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लॉकडाउन में एफडी गिरवी रख जुटाई थी वेतन की राशि

लॉकडाउन में सिटको को अपने कर्मचारियों को वेतन देने केलिए फिक्स डिपाजिट गिरवी रख बैंक से ऋण लेना पड़ा था। पहले से घाटे में चल रहे सिटको को लॉकडाउन ने बड़ा झटका दिया। मई 2020 में प्रशासन से सहायता न मिलने पर सिटको ने 9 करोड़ रुपये की एफडी को बैंक में गिरवी रखा। बैंक ने 5 करोड़ रुपये सिटको को गिरवी एफडी की एवज में जारी किए। इस राशि से सिटको ने कर्मचारियों के वेतनमानों का भुगतान किया।
जानकारी मिली है कि सिटको घाटे से जूझ रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं। कोरोना से असर तो पड़ा ही है। कुछ की जानकारी मुझे भी है। आने वाले दिनों में जल्द ही एक बैठक बुलाएंगे और समीक्षा की जाएगी। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक।
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