वह तो मरीजों के दस्तावेज तैयार करवाता था। तस्दीक हो जाने के बाद अस्पताल के खाते में पेमेंट जारी हो जाती थी। अस्पताल के पास ही कुछ वरिष्ठ सैनी अधिकारियों की फर्जी मोहरे हैं, जिसे इस्तेमाल कर वह अपना फायदा उठा रहे हैं। ऐसा पिछले पांच वर्षों से हो रहा है।
अस्पताल के खिलाफ एक शिकायत पर तो इसकी एम्पैनल्मेंट भी रद्द कर दी गई थी। हाईकोर्ट को बताया गया कि सेना ने पिछले साल ऐसे ही कई अस्पतालों के 15 डॉक्टरों और 25 अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी लेकिन पुलिस ने जांच के बाद इन केसों को बंद कर दिया है। इस एफआईआर को भी रसूखदारों के प्रभाव में बंद कर दिया जाएगा।
17 जनवरी तक जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश
हाईकोर्ट ने केस के सभी तथ्यों को सुनने के बाद कहा कि यह बेहद ही गंभीर मामला है, ऐसे में इस मामले की उच्च स्तरीय जांच बेहद जरूरी है। हाईकोर्ट ने डीजीपी प्रबोध कुमार की अध्यक्षता में एसआईटी गठित कर जांच का आदेश दिया है। उन्हें अपनी पसंद के अधिकारी, जिसमें एक एसएसपी स्तर का अधिकारी को शामिल करने की छूट दी है। साथ ही पंजाब के डीजीपी को आदेश दिया है कि वह इस एसआईटी को लॉजिस्टिक सपोर्ट सहित कैंप ऑफिस और अन्य सुविधाएं प्रदान करें। एसआईटी को मामले की जांच कर इसकी स्टेटस रिपोर्ट 17 जनवरी को हाईकोर्ट में पेश करने का आदेश दिया।